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ग्रामीण व शहरी युवाओं के लिए खुले है स्वरोजगार के द्वारः सुधीर शर्मा -जिला में औद्योगिक विकास हेतु व्यय किए जाएंगे 106 करोड़ रूपये

धर्मशाला, 11 जुलाई: जिला में प्रदेश सरकार द्वारा औद्योगिक विकास हेतु 106
करोड़ रूपये खर्च किए जाएंगे। यह जानकारी शहरी विकास, नगर नियोजन व आवास मंत्री
श्री सुधीर शर्मा ने देते हुए बताया कि औद्योगिक विकास हेतु इंदौरा तहसील के
कंदरोड़ी क्षेत्र में स्टेट ऑफ आर्ट औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए भूमि
का चयन करके इसे औद्योगिक विकास निगम को सौंप दिया गया है ताकि औद्योगिक
क्षेत्र के लिए आधार भू-संरचना का निर्माण किया जा सके। इस औद्योगिक क्षेत्र
में 106 करोड़ रूपये खर्च करना प्रस्तावित है। शीघ्र औद्योगिक तथा आधारभूत
सुविधाएं उपलब्ध करवाने हेतु हिमाचल प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम द्वारा
औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने का कार्य आरम्भ कर दिया जाएगा।
     श्री सुधीर शर्मा ने बताया कि जिला के विभिन्न भागों में औद्योगीकरण समान
रूप से हो इस उद्देश्य के साथ जिला में 7 औद्योगिक क्षेत्र व 3 औद्योगिक
बस्तियां विकसित की गई है। जिनमें संसारपुर टैरस, राजा का बाग, बांई अटारियॉ,
नगरोटा बगवां, ढलियारा, स्टेट ऑफ आर्ट इण्डस्ट्रीयल एरिया कंदरोड़ी को विकसित
किया जा रहा है जिसका कुल रकवा 72-82-74 हैक्टयर है।
     श्री सुधीर शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2014-15 में 77
औद्योगिक इकाईयों को पंजीकरण हुआ। इन इकाईयों में 273 लोगों को रोजगार प्राप्त
हुआ है तथा इन इकाईयों में उद्यमियों द्वारा 770.77 लाख रूपये का पूंजी निवेश
किया गया है। जबकि वर्ष 2013-14 में 96 स्थाई पंजीकरण किए गए जिसमें 273 लोगों
को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए। इन इकाईयों में उद्यमियों द्वारा 770.77 लाख
रूपये का पूंजी निवेश किया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012-13 में 70
इकाईयां स्थापित की गई जिसमें 1096.94 लाख रूपये का पूंजी निवेश किया गया तथा
380 लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है।
     श्री सुधीर शर्मा ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की जानकारी देते
हुए बताया कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2014-15 में 310 लोगों को रोजगार
उपलब्ध करवाया गया। जिसमें 102.955 लाख रूपये के रूप में अनुदान राशि
लाभार्थियों को वितरीत की गई। वर्ष 2013-14 में 185 लोगों को रोजगार उपलब्ध
करवाया गया था जिसमें 66.78 लाख रूपये के रूप में अनुदान राशि लाभार्थियों को
वितरीत की गई थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2012-13 में इस योजना के अंतर्गत जिला
के 225 लोगों को रोजगार उपलब्ध हुआ जिस पर 54.7285 लाख रूपये की अनुदान राशि
लाभार्थियों को प्रदान की गई।
     श्री सुधीर शर्मा ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्वरोजगार
उद्यमों, परियोजनाओं, सुक्ष्म उद्यम की स्थापना के माध्यम से प्रदेश के
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार अवसरों का सृजन करना, व्यापक रूप से
दूर-दूर अव्यवस्थित परम्परागत कारीगरों, ग्रामीण और शहरी बेरोजगार युवाओं को
एक साथ लाना और जहां तक सम्भव हो स्थानीय स्तर पर ही उन्हें स्वरोजगार के अवसर
उपलब्ध करवाना है। उन्होंने कहा कि कारीगरों की पारिश्रमिक अर्जन क्षमता बढ़ाना
और ग्रामीण तथा शहरी रोजगार की विकास दर बढ़ाने में यह कार्यक्रम कारगर सिद्ध
हो रहा है।
     सुधीर शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना में कोई भी बेरोजगार
व्यक्ति जिसकी आयु 18 वर्ष से अधिक हो और कम से कम 8वीं कक्षा तक पढ़ा हो।
विनिमार्ण क्षेत्र में 25 लाख व सेवा क्षेत्र में 10 लाख तक की लागत की
परियोजना हेतु बैंक से ऋण प्राप्त कर सकता है। जिसमें सामान्य वर्ग के
लाभार्थी द्वारा 10 प्रतिशत व विशेष श्रेणी वर्ग के लाभार्थी द्वारा 5 प्रतिशत
अंशदान अपनी ओर से लगाना पड़ता है। इसके अतिरिक्त सामान्य वर्ग के लाभार्थी के
लिए 25 प्रतिशत की दर से एवं विशेष श्रेणी वर्ग के लाभार्थी के लिए 35 प्रतिशत
की दर से अनुदान का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि लाभार्थियों का चयन जिला
स्तर पर गठित कार्य समिति द्वारा किया जाता है।
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