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गर्मी के चलते लाहौल के नदी-नाले उफान पर

केलंग 16 जुलाई (हीरा लाल) प्रदेश के अन्य हिस्सों में जहां इन दिनों मानसून की वर्शा हो रही है, वहीं जनजातीय जिला लाहौल स्पिति में करीब एक माह से अधिक समय से बारिश नही होने से तापमान में बढ़ोतरी दर्ज हुई है जिससे सदियों पुराने ग्लेशियर पिघल रही है। गर्मी के चलते घाटी में सदियों पुराने ग्लेशियर पिघलने की रफतार तेज हो गयी है जिससे घाटी की सभी छोटे-बडे नालों तथा चन्द्राभागा की सहायक नदियां मुलिंग,शंशा , नालडा, थिरोट,झोलिंग सहित सभी नालों में जलस्तर बढने से चन्द्राभाग नदी इन दिनों उफान पर है। बदलते मौसम का असर है कि ग्लेशियरके पिघलने की रफतार तेज हो गयी है। घाटी के बुजुर्ग सोनम बाटा का कहना है कि पहले जमाने में सर्दियों में भारी मात्रा में बर्फ पडती थी जिससे ग्लेशियर बनते थे साथ ही गर्मियों में पिघलने की रफतार भी कम थी परन्तु ग्लोबल बार्मिग के चलते तथा सर्दियों मंे कम बर्फवारी से ग्लेशियर सिकुडते जा रहे है जो चिन्ता का विशय है। उन्होंने चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाले समय में यहीं स्थिति रहा तो किसानो को सिचंाई के लिए पानी नही मिलेगा जिससे खेती-बाडी करना मुश्किल हो जायेगा ।
लोगों का कहना है कि जहां निचलेे क्षेत्रों में बरसात का मौसम है वहीं जिले में पिछले एक माह से बारिष नही हुई है जिससे गर्मी बढ गयी है। ऐसे गर्मी में ग्लेशियर तेजी से पिघल रही है तथा चन्द्राभागा नदी उफान पर है जिससे चन्द्राभागा नदी पर बने पुराने पुलों को खतरा हो सकता है।

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