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गढ़खल में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित

G 27-04-2014-B (1)
सोलन, 27 अप्रैल – कानून के समक्ष सभी बराबर है, कानून किसी से भेदभाव नहीं करता। सभी लोगों को न्याय प्राप्त हो, विधिक सेवा प्राधिकरण की स्थापना का यही मकसद है। यह बात कसौली के न्यायाधीश गौरव महाजन ने आज ग्राम पंचायत गढ़खल में आयोजित विधिक साक्षरता शिविर की अध्यक्षता करते हुए कही। महाजन ने कहा कि गरीब न्याय से वंचित न रहे, इसके लिये विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा निःशुल्क मुकद्मा लड़ने की व्यवस्था की गई है। सभी महिलाओं, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लोग, बच्चे, अपंग व बेसहारा लोगों तथा प्रत्येक वह परिवार जिसकी सालाना आय एक लाख रूपये तक है, मुफत न्याय सुविधा प्राप्त करने के हकदार है। इसके लिये सादे कागज पर न्यायालय में अथवा उपमण्डल स्तरीय विधिक सेवा समिति के समक्ष आवेदन करने पर व्यक्ति को प्राधिकरण की ओर से अधिवक्ता उपलब्ध करवाया जाता है और किसी प्रकार का खर्च नहीं करना पड़ता। महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा से बचाव अधिनियम पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि घर-परिवार के किसी व्यक्ति अथवा अन्य व्यक्ति द्वारा महिलाओं से शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक हिंसा इस अधिनियम के दायरे में आती है और दोषी व्यक्ति के खिलाफ प्रोटेक्शन अधिकारी अथवा पुलिस स्टेशन में महिला शिकायत कर सकती है। न्यायालय में ऐसे मामलों का निपटारा 60 से 90 दिनों के भीतर किया जाता है। उन्होंने बताया कि यह एक संवेदनशील अधिनियम है और दोषी को हर हालत में सजा होती है। उन्होंने इस मौके पर लोगों से आगामी 7 मई को होने वाले चुनाव में सभी लोगों को मताधिकार का प्रयोग करने की अपील भी की। अधिवक्ता यादविन्द्र ने सूचना का अधिकार व हिरासत के वक्त व्यक्तियों के अधिकार पर चर्चा करते हुए बताया कि किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेने से पहले उसे स्पष्ट तौर पर कसूर बताना जरूरी है। पुलिस व्यक्ति को गिरफतार करते वक्त उसके परिवार के सदस्य या चुने हुए प्रतिनिधि को भी अवगत करवाएगी। गिरफतारी के बाद व्यक्ति की चिकित्सा जांच करवाना भी जरूरी है। गिरफतार व्यक्ति पूछताछ के दौरान अपने अधिवक्ता से मिलने की अनुमति ले सकता है। अधिवक्ता दलीप तनवर ने कहा कि अत्यधिक वाहनों की आवाजाही के कारण सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को राहत की जरूरत पड़ती है। उन्होंने कहा कि मोटरयान अधिनियम के तहत प्रभावित व्यक्ति को प्रतिकर दिलाने का प्रावधान है। दुर्घटना में हुए नुकसान का भुगतान दुर्घटना करने वाले वाहन के स्वामी अथवा चालक का होता है। अधिनियम के अन्तर्गत परपक्ष बीमा पाॅलिसी करवाना अनिवार्य है। ऐसे में नुकसान भरपाई का दायित्व बीमा कम्पनी का हो जाता है। इसके लिये चालक के पास लाईसेंस होना जरूरी है। सीनियर डिवीजन न्यायालय कसौली कार्यालय के अधिक्षक अमर सिंह मैहला ने जानकारी दी कि इसी तरह के विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन 20 जुलाई,2014 को जगजीत नगर में भी किया जायेगा।

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