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केदारनाथ में पूजा को लेकर शंकराचार्य और मंदिर के रावल में जुबानी जंग

3 जुलाई केदारनाथ :केदारनाथ मंदिर में पूजा को लेकर धर्म गुरुओं में ठन गई है. द्वारकापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और केदारनाथ मंदिर के रावल (मुख्य पुजारी) भीमाशंकर लिंग के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है.
केदारनाथ में आई तबाही के बाद मुख्य पुजारी भीमाशंकर लिंग केदारनाथ के चल विग्रह को लेकर गुप्तकाशी के उखी मठ ले आए. वहीं पर वह केदारनाथ की पूजा कर रहे हैं. रावल के मुताबिक मंदिर परिसर में कई श्रद्धालुओं की मौत होने से स्थान अपवित्र हो गया है. यहां शुद्धिकरण के बिना पूजा शुरू नहीं की जा सकती.

उधर, स्वामी स्वरूपानंद का कहना है कि जब भगवान शिव खुद मरघट में निवास करते हैं तो फिर भक्तों के मरने से मंदिर अपवित्र कैसे हो सकता है. इसलिए परंपरा का पालन करते हुए शीतकाल में कपाट बंद होने तक केदारनाथ मंदिर में ही पूजा-अर्चना होनी चाहिए. भगवान को उखीमठ ले जाने से स्वरूपानंद इतने खफा हैं कि उन्होंने रावल को पद से हटाने की मांग कर डाली.

शंकराचार्य को नहीं है पूजा का हक
रावल भीमाशंकर लिंग ने पलटवार करते हुए कहा कि शंकराचार्य और उनके शिष्यों को केदारनाथ की पूजा का अधिकार नहीं है. आदि शंकराचार्य ने यह परंपरा बनाई थी कि केदारनाथ और बदरीनाथ का मुख्य पुजारी नम्बूदरी ब्राह्मण होगा. आदि गुरु शंकराचार्य भी इसी परिवार से थे और उन्होंने ही बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिर बनवाया था. स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती चूंकि नम्बूदरी ब्राह्मण नहीं हैं इसलिए उनका आदि शंकराचार्य से कोई संबंध नहीं है.

रावल के समर्थन में उतरे वासुदेवानंद
इस आरोप-प्रत्यारोप में ज्योतिषपीठ बद्रिकाश्रम के शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती भी कूद पड़े. उन्होंने रावल के फैसले को बिल्कुल सही बताया है. उन्होंने कहा कि सर्दियों में उखी मठ में पूजा होती है, इसलिए आपात स्थिति में भी वहीं पूजा होनी चाहिए. उनके मुताबिक, समिति जिस तरह से उखी मठ में पूजा करा रही है वह शास्त्रानुकूल है. वासुदेवानंद ने कहा कि महाकुंभ में भी चतुष्पद की स्थापना को लेकर भी स्वामी स्वरूपानंद ने विवाद खड़ा किया था.

कब शुरू होगी पूजा
इस बीच, सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि मंदिर में पूजा कब शुरू होती है. लेकिन, केदारनाथ के हालात देखते हुए फिलहाल यह मुमकिन नहीं लगता. शिवलिंग कई फीट नीचे धंस गया है. हालांकि शिवलिंग या मंदिर में भगवान की किसी मूर्ति को नुकसान नहीं पहुंचा है. लेकिन, चिंता वहां से मलबा साफ करने और दबे शवों को हटाने की है. मौसम विभाग की आने वाले दिनों में भारी बारिश की भविष्यवाणी के बाद जल्द पूजा शुरू होने की उम्मीद धुंधली मालूम होती है.

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