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कीवी से भी अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं बागवान, उद्यान विभाग प्रति हैक्टेयर दे रहा है 75 हजार अनुदान

5 जुलाई कुल्लू : जलवायु परिवर्तन के कारण सेब उत्पादन के विकल्प के रूप में कुल्लू जिला के निचले क्षेत्रों के बागवानों के लिए कीवी एक नई उम्मीद लेकर आया है। कीवी नाम से प्रसिð यह चाइनीज गूजबैरी फल हिमाचल प्रदेश के मध्यवर्ती, निचले पर्वतीय क्षेत्रों तथा घाटियों में सफलतापूर्वक लगाया जा सकता है। इसके लिए सिंचाई सुविधा होनी चाहिए। कीवी की खेती के लिए गहरी, उपजाउ, बलुई, रेतीली दोमट मिटटी की आवश्यकता होती है और यह अंगूर की बेलों की तरह उगता है। इसे प्रतिवर्ष लगभग दो सौ चिलिंग आॅवर्स की जरूरत होती है।
कुल्लू जिला में कीवी की खेती को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग बागवानों की काफी सहायता कर रहा है। विभाग के माध्यम से चलाए जा रहे बागवानी तकनीकी मिशन के तहत बागवानों को कीवी की खेती के लिए प्रति हैक्टेयर 75 हजार रूपये अनुदान दिया जा रहा है। उद्यान विकास अधिकारी डा. बिंदू शर्मा ने बताया कि यह अनुदान तीन किश्तों में दिया जाता है।
भूरे रंग का लंबूतरा तथा अंडे के आकार का यह फल काफी पौष्टिक होता है तथा इसे बाजार में काफी अच्छे दाम मिलते हैं। कीवी में विटामिन बी व सी, फाॅस्फोरस, पोटाश और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होती है। यह हमारे शरीर में एचडीएल यानि अच्छे काॅलेस्ट्राॅल की मात्रा बढ़ाता है जिससे हृदय रोग की आशंका नहीं रहती।
पौष्टिकता के कारण कीवी की बड़े शहरों में काफी मांग रहती है। इस कारण बागवानों को इसके अच्छे दाम मिलते हैं। डा. बिंदू शर्मा ने बताया कि कुल्लू जिला में कीवी की मुख्य किस्में ब्रूनो एलिसन, मौंटी, हेवर्ड और अबाॅट उगाई जा सकती हैं। उन्होंने बताया कि कीवी में नर व मादा किस्में होती हैं। बगीचे में इन किस्मों को बेहतर संतुलन बनाकर बागवान अच्छा उत्पादन कर सकते हैं। कीवी के पौधे के लिए एनपीके खाद की आवश्यकता होती है। इसके पौधे चार-पांच साल में ही फल देना आरंभ कर देते हैं। इसकी प्रति बेल 25 से 100 किलोग्राम तक फल दे सकती है। ये फल अक्तूबर से दिसंबर तक तैयार होते हैं। अन्य फलों का आॅफ सीजन होने के कारण इस अवधि में कीवी को काफी अच्छे दाम मिलते हैं। अतः कीवी की खेती कुल्लू जिला के मध्यवर्ती व निचले इलाकों के बागवानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है।

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