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किन्नौर जिला के बाढ़ प्रभावितों को मिलेगा समुचित मुआवजा

शिमला 2 जुलाई: मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न भागों विशेषकर जनजातीय जिला किन्नौर में गत दिनों 16 व 17 जून, 2013 को भारी वर्षा, बर्फबारी और भू-स्खलन के कारण जान-माल और सड़कों को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा के कारण वे स्वयं किन्नौर जिले के सांगला में तीन दिनों तक रूके रहे। उन्होंने स्वयं किन्नौर जाकर पूरी स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को तुरन्त राहत एवं पुनर्वास कार्य आरम्भ करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किन्नौर जिले में मटर, राजमाह और अन्य नकदी फसलों का बहुत नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई कांग्रेस की पहले रही सरकारों की तर्ज पर की जाएगी। उन्होंने कहा कि सेब व अन्य फलों को भी इस प्राकृतिक आपदा के कारण काफी नुकसान हुआ है। इसका आकलन किया जा रहा है और प्रभावित लोगों को समुचित मुआवजा दिया जाएगा।
श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि जिला मुख्यालय रिकांगपियो से, जो गांव सड़कों के क्षतिग्रस्त होने के कारण अलग-थलग पड़ गए हैं, वहां तत्काल राशन और अन्य आवश्यक वस्तुएं पहुंचाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि किन्नौर जिले की शारंग घाटी के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार किया जा रहा है और बसपा नदी पर वैली पुल स्थापित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन विभाग के चार वरिष्ठ अधिकारी किन्नौर जिले में राहत एवं पुनर्वास कार्यों के लिए तैनात किए गए। इन अधिकारियों ने नुकसान का जायजा लिया और लोगों को इसी अनुसार समुचित मुआवजा सुनिश्चित बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि किन्नौर जिले के विभिन्न भागो में फंसे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को निकालने के लिए हेलिकाप्टरों की उड़ानें नियमित तौर पर भरी गईं। यह सेवा आगे भी प्रदान की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लोगों को जान-माल की क्षति, घरों व निजी सम्पत्ति को हुए नुकसान, कृषि व बागवानी भूमि की पुनः कृषि व बागवानी योग्य बनाने, फसलों के हुए नुकसान, बीज तथा कीटनाशकों पर उपदान और पशुधन, चारे इत्यादि की समुचित भरपाई सुनिश्चित बनायेगी।

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