Header ad
Header ad
Header ad

कारगिल आप्रेशन में कांगडा के 15 जांबाजो ने दी थी शहादत, 26 जुलाई को शहीद स्मारक में शहीदों को दी जायेगी श्रद्धांजलि

25 जुलाई धर्मशाला :शहीदों की चिताओं पर हर वर्श मेले लगेंगे, वतन में मिटने वालों का बस यही निशां होगा। 26 जुलाई का दिन पूरे देश में कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जायेगा। इसी कड़ी में धर्मशाला में स्थित प्रदेश के एक मात्र शहीद स्मारक में इस महत्वपूर्ण दिवस पर श हीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जायेगी।
शहीद स्मारक जोकि पर्यटकों के लिये एक सैरगाह एवं आर्कशण का केन्द्र बना हुआ है वहीं पर यह स्मारक समाज के सभी वर्ग विषेशकर युवाओं को राश्ट्र की एकता एवं अंखडता का भी संदेश देता है जिससे लोगों में देश भक्ति की भावना एवं प्रेरणा मिलती है । इस शहीद स्मारक में अब तक भारत के साथ विभिन्न युद्धों में शहीद हुये 1376 जवानों के नाम अंकित हैं।
कारगिलआप्रेशन में जहां देश के 527 वीर जवानों ने अपने प्राणों की आहूति दी थी उनमें हिमाचल के 52 वीर जवानों में से 15 जवान कांगड़ा जिला से सम्बन्ध रखते थे जिनमें कैप्टन विक्रम बत्तरा एवं लै0 सौरभा कालिया पालमपुर से, गे्रनेडियर विजेंद्र सिंह देहरा से, नायक ब्रह्म दास नगरोटा से, राईफल मैन राकेश कुमार गोपालपुर से, राईफलमैन अशोक कुमार एवं नायक वीर सिंह ज्वाली से, नायक लखवीर सिंह, राईफलमैन संतोश सिंह और राईफलमैन जगजीत सिंह नूरपुर से, हवलदार सुरेन्द्र सिंह, ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह ज्वाली से, राईफलमैन जंग महत धर्मशाला से, ग्रेनेडियर सुरजीत सिंह देहरा और नायक पदम सिंह इन्दौरा से सम्बन्ध रखते थे जिन्होंने कारगिल आप्रेशन में घुसपैठियों को खदेड़ने में अदम्य साहस का परिचय दिया था ।
कारगिल विजय पर भारत सरकार द्वारा 4 रणबांकुरों को सेना के सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से नवाजा गया था जिनमें से दो परमवीर चक्र से हिमाचल प्रदेश के जांबाज कैप्टन विक्रम बत्तरा को मरणोपरांत तथा राईफलमैन संजय कुमार को विभूशित किया गया था जबकि सेना के सर्वोच्च सम्मान प्रथम परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले मेजर सोमनाथ शर्मा कांगडा जिला से ही सम्बन्ध रखते थे ।
कांगड़ा जिला अतीत से ही जहां षक्तिपीठों के लिये विष्वविख्यात है वहीं पर इस जिला के वीर सपूतों एवं जाबाजों का स्वतंत्रता संग्राम एवं स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत भारत के साथ हुये विभिन्न युद्धों में मातृभूमि की रक्षा के लिये सर्वाधिक बलिदान रहा है।
कारगिल आप्रेषन में भारतीय सेना ने शौर्य और बलिदान की उस सर्वौच्च परम्परा का निर्वहन किया जिसकी सौगंध हर सेना का जवान झंडे के नीचे लेता है और कृतज्ञ राश्ट्र षहीदों की कुर्बानी को कभी नहीं भुला पायेगा।

Share

About The Author

Related posts

Leave a Reply

 Click this button or press Ctrl+G to toggle between multilang and English

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Please Solve it * *