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कांगड़ा के 94 गांव को मिली सेंक्चुरी एरिया से राहत: सुधीर

धर्मशाला, 12 जुलाईः प्रदेश के 775 गांवों को सेंक्चुरी एरिया से बाहर करने के लिए जारी अधिसूचना का शहरी विकास एवं आवास मंत्री, श्री सुधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री, श्री वीरभद्र सिंह का आभार व्यक्त किया है और कहा कि इस अधिसूचना से कांगड़ा जिला के 94 गांव को राहत मिली है।
श्री सुधीर शर्मा ने बताया कि वर्ष 1999 में प्रदेश के 7161 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को वन्य प्राणी अभ्यारण क्षेत्र के अन्तर्गत लाया गया था, जिसमें प्रदेश के 793 गांवों में रहने वाले एक लाख से अधिक लोग अपने मूलभूत अधिकारों से वंचित हो गये थे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004-05 के दौरान मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह द्वारा वन्य प्राणी अभ्यारण क्षेत्र के युक्तिकरण की प्रक्रिया आरम्भ की गई थी, ताकि आबादी वाले क्षेत्रों को वन्य प्राणी क्षेत्र से मुक्त रखा जाए ताकि इन क्षेत्रों मंे रहने वाले लोग सामान्य रूप से जीवनयापन कर सकें।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के पुनः सत्ता संभालने पर इस महत्वपूर्ण मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर हल करने के लिये प्रयास किये गये तथा पहली फरवरी 2013 को माननीय सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा इस सम्बन्ध में अपना ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए प्रदेश के 793 में से 775 गांवों को वन्य प्राणी अभ्यारण क्षेत्र से मुक्त करने सम्बन्धी अधिसूचना जारी करने के निर्देश दिये गए थे।
शहरी विकास मंत्री ने बताया कि इस अधिसूचना के अनुसार जिला कांगड़ा का 1372 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वन्य प्राणी क्षेत्र के अधीन किया गया था। जिसमें 1118 वर्ग किलोमीटर धौलाधार वन्य प्राणी तथा 254 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पौंग वन्य प्राणी क्षेत्र शामिल था। जिसकी वजह से कांगड़ा जिला के इस अधिसूचित वन्य प्राणी क्षेत्र में रहने वाले 99 गांवों के लोग प्रभावित हुए थे। जिसमें बैजनाथ क्षेत्र के 44 गांव धौलाधार वन्य क्षेत्र तथा 55 गांव पौंग वन्य प्राणी क्षेत्र के शामिल थे। जिनमें से बैजनाथ क्षेत्र के 43 और पौंग के 51 गांवों को राहत मिली है।
श्री शर्मा ने बताया कि प्रदेश के वन्य प्राणी अभ्यारण क्षेत्र से बाहर किए गए गांवों के बदले ऐसे क्षेत्रों को वन प्राणी अभ्यारण क्षेत्र में सम्मिलित किया जाएगा, जिसमें किसी प्रकार की आबादी प्रभावित न हो। उन्होंने बताया कि नए क्षेत्र शामिल करने से प्रदेश में वन्य प्राणी अभ्यारण क्षेत्र अब 7161 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 8358 वर्ग किलोमीटर हो जाएगा, जोकि प्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 15 प्रतिशत होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में वन्य प्राणी क्षेत्र के अन्तर्गत 33 वन्य प्राणी शरण्य स्थल तथा दो राष्ट्रीय उद्यान हैं, जबकि युक्तिकरण के उपरान्त प्रदेश में 26 वन्य प्राणी शरण्य स्थल, 5 राष्ट्रीय उद्यान और 3 कंजरवेशन रिजर्व हो जाएंगे।

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