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करोड़ों की सब्सिडी हुई मिट्टी

गगरेट, 2 जुन – किसानों को पॉलीहाउस निर्माण के लिए प्रेरित कर करोड़ों रुपये की सब्सिडी बांटने के बावजूद सरकार की महत्वाकांक्षी पंडित दीनदयाल किसान बागवान समृद्धि योजना का हाल बेहाल है। सब्सिडी के रूप में बांटे गए करोड़ों रुपये ही मिट्टी नहीं हुए हैं बल्कि कई किसानों ने तो सब्सिडी के पैसे डकारने के साथ ही पॉलीहाउस के लिए जो ढांचा खड़ा किया था, उसे भी बेच दिया है। वहीं, कृषि विभाग के पास आंकड़े ही उपलब्ध नहीं हैं कि इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत स्थापित करवाए गए कितने पॉलीहाउस चालू स्थिति में हैं। पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में किसानों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित पंडित दीनदयाल किसान बागवान समृद्धि योजना को प्रदेश में शुरू किया गया था। इस योजना के तहत लाभान्वित होने वाले किसानों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी देने का प्रावधान था। किसानों के लिए एक हजार वर्ग मीटर के पॉलीहाउस से लेकर 250 वर्गमीटर के पॉलीहाउस लगाने पर सब्सिडी उपलब्ध करवाई गई थी। एक हजार वर्ग मीटर के पॉलीहाउस पर आठ लाख रुपये प्रदान करने का प्रावधान था। योजना अच्छी थी और इसके बेहतर क्रियान्वयन के लिए प्रदेश सरकार के प्रयासों को केंद्र सरकार के स्तर पर सराहा भी गया था। ऊना जिला में भी इस योजना के तहत सैकड़ों किसानों ने पॉलीहाउस के निर्माण में दिलचस्पी दिखाने के साथ करोड़ों रुपये सब्सिडी के रूप में हासिल किए थे। इनमें से ऐसे भाग्यशाली पॉलीहाउस कम ही निकले जिनमें आज भी सब्जी उत्पादन होकर किसान आर्थिक रूप से मालामाल हो रहे हैं। इस योजना के धरातल स्तर पर धराशयी होने के कई कारण रहे। कई किसानों ने तो सब्सिडी हासिल करने के लालच में ही इसके निर्माण में दिलचस्पी दिखाई। कई किसान तैयार उत्पाद बेचने के लिए बाजार की उपलब्धता न होने के कारण इससे मुंह मोड़ गए। सबसे अहम वजह यह रही कि कृषि विभाग किसानों को पॉलीहाउस लगाने के लिए प्रेरित करने के बाद उनकी सुध लेना भूल गया। कृषि विभाग के अधिकारी पॉलीहाउस निर्माण के लिए सब्सिडी जारी करने के बाद किसानों के पास नहीं गए। यहां तक कि पॉलीहाउस के लिए सरकारी अनुदान पाने के लिए कृषि विभाग ने पॉलीहाउस को कुछ साल तक चालू हालत में रखने की शर्त तक नहीं लगाई। नतीजतन किसानों ने पॉलीहाउस निर्माण को सब्सिडी पाने का सबसे बेहतर जरिया माना। इस योजना के तहत जितने पॉलीहाउस लगाए गए थे, उनमें से अधिकांश ठप हो चुके हैं। हैरत की बात यह है कि कुछ किसानों ने तो वे ढांचे ही अब बेच दिए हैं जिसे स्थापित करने के बाद ही उन्हें सब्सिडी मिली थी। इससे जाहिर है कि सरकार द्वारा किसानों के उत्थान के लिए खर्चे गए करोड़ों रुपये मिंट्टी में मिल कर रह गए हैं। कृषि विभाग का उदासीन रवैया यह है कि विभागीय अधिकारियों को यह तक पता नहीं है कि उनके क्षेत्र में इस योजना के तहत लगे कितने पॉलीहाउस बंद हो चुके हैं और कितने चालू हालत में हैं। इस योजना का बुरा हश्र होने के बाद भी कृषि विभाग ने इससे सबक नहीं लिया है। किसान बागबान समृद्धि योजना के नाम से अब चलाई जा रही इस योजना के तहत किसान दो हजार वर्गमीटर तक पॉलीहाउस का निर्माण कर सकता है। इसके निर्माण पर मिलने वाले अनुदान की राशि अब 80 प्रतिशत से बढ़ाकर 90 प्रतिशत कर दी गई है। कितने पॉलीहाउस लगाए, पता नहीं यह पुख्ता आंकड़ा नहीं है कि पंडित दीनदयाल किसान बागवान समृद्धि योजना के तहत कितने पॉलीहाउस लगाए गए थे। हालांकि अंदाजा है कि 50 के करीब किसानों को इस योजना के तहत अनुदान दिया गया था। इनमें से कितने पॉलीहाउस चालू हालत में हैं, इसका पता नहीं है। अमूमन पांच-छह पॉलीहाउस मालिक बेहतर काम कर रहे हैं।

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