October 18, 2017

कचहरी चौक-पेट्रोल पंप पर आखिर कब तक जलेंगे पुतले

धर्मशाला, 21 अप्रैल – मिनी राजधानी धर्मशाला में आखिर कब तक आंदोलनों के दौरान पुतले व रैलियों के पटाखे कचहरी चौक में ही जलते रहेंगे। इस बात को लेकर आम जनता ने भी सरकार व प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। आम जनता सरकार और प्रशासन से सवाल पूछ रही है कि आखिर मिनी राजधानी में अब तक आंदोलनों और रैलियों को संबोधित करने के लिए कोई उपयुक्त स्थान क्यों नहीं बन पाया है। गौर हो कि जिला मुख्यालय धर्मशाला में उपायुक्त कार्यालय में आने वाले संघ, संगठन कचहरी चौक में ही अपना प्रदर्शन करते हैं। इसके अलावा प्रदेश के बड़े-बड़े राजनेताओं द्वारा भी कचहरी चौक से ही लोगों को संबोधित करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इतना ही नहीं, पेट्रोल पंप के ठीक सामने पुतलों को जलाने का सिलसिला लंबे समय से चला हुआ है। आजकल लोकसभा चुनावों में नामांकन भरने के लिए आने वाले नेताओं के रोड शो में भी कचहरी चौक में खूब पटाखे फूट रहे हैं। जनप्रतिनिधि और विभिन्न संघों के पदाधिकारी जनता से अपने संवाद स्थापित करने को एक दुकान के ऊपर खड़े रहते हैं। साथ ही निर्वासित तिब्बत सरकार के आंदोलनों को भी मुख्य स्थान कचहरी चौक ही बन चुका है। धर्मशाला के आम लोगों में से युवा सुमित शर्मा का कहना है कि सरकार व प्रशासन को रैलियों, आंदोलनों के लिए उचित स्थान उपलब्ध करवाना चाहिए। शहर के वरिष्ठ नागरिक व समाजिक कार्यकर्ता शरण दास का कहना है कि मिनी राजधानी में लोगों को संवाद स्थापित करने को उचित मंच मिलना चाहिए, चौक के शोरगुल में सभी मुद्दे दबे हुए दिखते हैं। सागर डोगरा का कहना है कि पैट्रोल पंप के सामने पटाखे व पुतले जलाने पर पूरी तरह से रोक लगाकर और नियमों के अनुसार ट्रैफिक व्यवस्था बनाई रखनी चाहिए। रोटरी क्लब धर्मशाला के अध्यक्ष वाईके डोगरा का कहना है कि लोकतंत्र में संवाद अति महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। इसके लिए उचित प्रबंध करना शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है। युवा विनोद सोनी का कहना है कि मिनी राजधानी में आक्रोश और खुशी को व्यक्त करने का मंच न होना दुर्भाग्य है।

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