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औद्योगिक विकास की ओर तेजी से बढ़ते जिला बिलासपुर के कदम

16 जुलाई बिलासपुर (प्रविन्द्र ) जिला बिलासपुर हिमाचल प्रदेश के नक्शे पर औद्योगिक क्षेत्र के रूप में लगातार विकास की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है। वर्तमान में जिला में 1860 सूक्ष्म व छोटी औद्योगिक इकाईयां कार्यरत हैं जिनमें 15005.75 लाख रु0 का निवेश कर 4455 लोगों को रोजगार प्रदान किया गया है। औद्योगिक इकाईयांे में 4276 हिमाचली तथा 179 गैर हिमाचली कर्मचारी कार्यरत हैं। इन सूक्ष्म एवं लघु औद्योगिक इकाईयों के अतिरिक्त जिला मंें तीन अन्य बड़ी औद्योगिक इकाईयों भी स्थापित की गई हैं, इसमें एसीसी लिमिटेड गग्गल यूनिट बरमाणा में है जिसमें 62331.01 लाख रु0 का निवेश कर लगभग 25 हजार लोगों को प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध करवाया गया है।इस औद्योगिक यूनिट में 786 कर्मचारी कार्य कर रहे हैं।
इसी प्रकार सूरज फेबरिक्स (स्टील डिवीजन) के नाम से जिला के श्री नैनादेवी जी तहसील के अंतर्गत ग्वालथाई औद्योगिक क्षेत्र में 3447.53 लाख रु0 का निवेश कर 214 लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाया गया है। इसके अतिरिक्त एसपीएस स्टीलो उद्योग 5233.34 लाख रु0 का निवेश कर इसी औद्योगिक क्षेेत्र में चलाया गया है जिसमें क्षेत्र के 248 लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाया जा रहा है। इस प्रकार इन तीन बड़े उद्योगों 710.12 करोड़ रु0 की राशि निवेश कर जिला में 1248 लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाया किया गया है। जिला बिलासपुर में दो औद्योगिक क्षेेत्र हैं जो मुख्यतः औद्योगिक क्षेत्र बिलासपुर तथा औद्योगिक क्षेत्र ग्वालथाई के नाम से प्रसिद्ध हैं। औद्योगिक क्षेत्र बिलासपुर 98.06 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ है जिसमें 76 उद्यमियों को 83 प्लाट व 9 शैड आवंटित किए गए हैं। इस औद्योगिक क्षेत्र में 51 इकाईयां कार्य कर रही है। इस औद्योगिक क्षेत्र में मुख्यतः एग्रो आधारित इकाईयां अपने यूनिट लगाने क लिए आगे आई हैं।
इसी प्रकार औद्योगिक क्षेेत्र ग्वालथाई में 143 प्लाटों को विकसित किया गया है जिसमें से 124 प्लाटों में विभिन्न प्रकार के यूनिट स्थापित करने क लिए उद्यमियों को आवंटित किए गए हैं। यह औद्योगिक क्षेत्र 685.17 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ है। इस औद्योगिक क्षेत्र में मुख्यतः स्टील आधारित इकाईयों की स्थापना की गई है। 31 यूनिटों द्वारा इस आद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन शुरू कर दिया गया है। जिला में अधिक से अधिक क्षेत्र को औद्योगिक क्षेेत्र के अंतर्गत लाने हेतु नंद बैहल में 294.07 बीघा, बस्सा में 307.19 बीघा क्षेत्र को औद्योगिक दृष्टि से विकसित करने के लिए वन विभाग के साथ वन संरक्षण अधिनियम के तहत अनुमोदन प्राप्त करने के लिए प्रयास किए जा रहे है जिसके लिए प्रक्रिया प्रगति पर है।
गत वर्ष 31-12-2012 तक जिला में स्थाई पंजीकरण/ईएम-2 के अंतर्गत 790.23 लाख रु0 निवेश कर 30 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की गई जिसमें 128 हिमाचली तथा 22 गैर हिमाचली लोगों की रोजगार उपलब्ध करवाया गया। इसी प्रकार अस्थाई पंजीकरण ईएम-1 के अंतर्गत 214.92 लाख रुपये का निवेश कर 18 इकाईयों की स्थापना कर 111 लोगों को रोजी-रोटी के साथ जोड़ा गया। इसके साथ-साथ जिला में औद्योगिक क्षेत्र को और अधिक बढ़ाने के लिए ग्वालथाई के साथ लगते 172.01 बीघा क्षेत्र को औद्योगिक क्षेत्र के अंतर्गत लाने के लिए वन विभाग के साथ पत्राचार किया जा रहा हैं तथा इस प्रक्रिया के संपूर्ण हो जाने पर स्थानीय लोगों को रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।
जिला में विभाग द्वारा भारत सरकार द्वारा अनुमोदित प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम संचालित किया गया है जिसके अंतर्गत ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में सूक्षम उद्योगों की स्थापना की जा रही है और अधिक से अधिक बेरोजगारों को रोजगार प्रदान किया जा रहा है। यह योजना राज्य खादी ग्रामीण उद्योग बोर्ड, जिला उद्योग केंद्र तथा बैंकों के माध्यम से संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत सर्विस उद्योग की स्थापना के लिए 10 लाख रूपए तक जबकि उत्पादन करने वाले उद्योगों के लिए 25 लाख रुपए ऋण के रूप में प्रदान किए जाते हैं। जिला बिलासपुर में इस योजना के तहत गत वर्ष विभाग द्वारा 17 के मुकाबले 61 औद्योगिक इकाईयों के लिए 70.9922 लाख रु0 की उपदान राशि प्रदान की गई है। इस योजना के अंतर्गत गत वर्ष 219 लोगों को रोजगार प्रदान किया गया है। इस योजना के तहत सामान्य वर्ग के लोगों को 25 प्रतिशत तथा विशेष वर्ग के उद्यमियों को 35 प्रतिशत राशि उपदान के रूप में प्रदान की जाती है।
ग्रामीण आर्टिसन /ग्रामीण उद्योग कार्यक्रम को विभाग द्वारा जिला में लागू किया गया है जिसके तहत पात्र ग्रामीण युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है तथा जो विशेष प्रकार के ट्रे्रड में प्रशिक्षण लेना चाहते हैं, उन्हंे विभाग की ओर से 100 रु0 प्रति माह प्रति प्रशिक्षणार्थी बजीफे के रूप में प्र्रदान किए जा रहे हैं। मास्टर ट्रेनर के रूप में इस योजना के अंतर्गत 50 रु0 प्रति माह प्रशिक्षण कोर्स के पूरा हो जाने पर प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी को विभाग की ओर से आॅनरेरियम राशि के रूप में प्रदान किए जाते हैं। इस योजना के तहत गत वर्ष 3,28,700 रु0 व्यय कर 149 सामान्य वर्ग के युवाओं, एससीएसपी के तहत 2,20,000रू0 व्यय कर 73 पात्र युवाओं तथा बीएएसपी के तहत 2,17,300 रु0 व्यय कर 54 पात्र युवाओं को लाभान्वित किया गया। विभाग द्वारा जिला में गत वर्ष औद्योगिक प्रोन्नति एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन कर 50 हजार रु0 व्यय करके अनुसूचित जाति तथा एनएससी परिवारों के 30 लोगों को लाभान्वित किया गया। इसके अतिरिक्त पूंजी निवेश उपदान योजाना के तहत जिला में स्थापित 5 यूनिटों को संयत्र तथा मशीनरी में निवेश के लिए 15 प्रतिशत उपदान पर 7,30,137 रु0 की राशि प्रदान की गई।
इसी प्रकार महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना के तहत जिला में बुनकर अभिभावकों के 9वींे से 12वीं कक्षा में पढ़ रहे बच्चों को 300 रु0 प्रति त्रैमास की दर से वजीफा प्रदान किया जा रहा है। यह राशि प्रत्येक बीमित बुनकर परिवार के केवल दो बच्चों के लिए देय है तथा इसकी अधिकतम अवधि चार वर्ष है। इस योेजना के तहत ऐसे प्रत्येक बच्चों का हर वर्ष अपनी कक्षा में पास होना अनिवार्य होगा तथा फेल होने की स्थिति में यह राशि दूसरे साल उन्हें नहीं देय होगी। इस योजना के तहत विभाग की ओर से बीमित बुनकर की प्राकृतिक रूप से मौत होने पर 60 हजार रू0, दुर्घटना के कारण मौत होने पर 1 लाख 50 हजार रू0, दुर्घटना की बजह से स्थाई रूप से संपूर्ण अपंगता आने पर एक लाख 50 हजार रु0 तथा दुर्घटना के कारण आंशिक रूप से स्थाई अपंगता होनेे पर 75 हजार रु0 क्लेम राशि के रूप में प्रदान किए जाते हैं। इसमें 330 रु0 का एक साल का बीमा किया जाता हैं जिसमें भारत सरकार , जीवन बीमा निगम तथा लाभार्थी का अंश क्रमश 150रू0, 100रू0, तथा 80रू0 निर्धारित किया गया है। इस योजना के तहत जिला में गत वर्ष 79 लोगों को लाभान्वित किया गया।
इसी प्रकार स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत गत वर्ष जिला बिलासपुर में विभाग द्वारा 102 लोगों को लाभान्वित किया गया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश में बुनकर समुदाय को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना है। इस योजना के अंतर्गत बुनकर उसकी पत्नी तथा दो बच्चों को कवर किया जाता है। इस योजना के अंतर्गत एनसिलरी हथरघा में कार्यरत बुनकर समुदाय से संबंधित वर्कर्स, रैमर्स, वाइडर्स, डाइर्ज, प्रिंटर्स, फिनिशिंग, साइजिंग, जहाला मेकिंग तथा जैकर्ड कटिंग इत्यादि से जुड़े सभी कामगारों को कवर किया जाता है। इस योजना के अंतर्गत बुनकर का 770.99 रुपये का बीमा एक साल के लिए किया जाता है जिसमें उसे केवल 69.90 रुपये बीमा राशि के रूप में देने होते हैं।इसमें भारत सरकार का अंश 631.19 रू0 तथा सर्विस टैक्स 71.99 रू0 तथा ्रपदेश सरकार का अंश 69.90 रू0 होता है। इसमें 80 साल तक की आयु के बुनकर समुदाय के लोगों को कवर किया जाता है। इस योजना के अंतर्गत प्रति परिवार के पात्र चार लोगों को किसी प्रकार की पुरानी व नई बीमारी के लिए 15 हजार रुपए, मातृत्व लाभ के लिए 2 बच्चों तक 2500 रुपए, दंत चिकित्सा क लिए 250 रुपए, नेत्र चिकत्सा के लिए 75 रु0, चश्मा लगाने के लिए 250 रुपये, डामीसियलरी हास्पिटलाईजेशन के लिए 4 हजार रु0, आयुर्वेदिक/यूनानी/होम्योेपैथिक/ सिद्धा पद्धति के तहत चिकित्सा के लिए 4 हजार रुपए, हास्पिटलाइजेशन के लिए 14 हजार रुपए, बेबी कवरेज के लिए 500 रुपये, ओपीडी के लिए 7500 रूपये की राशि सालाना प्रदान की जाती है। यह राशि प्रत्येक परिवार के केवल चार सदस्यों तक सीमित की गई है तथा इसके लिए प्रत्येक बीमारी पर होने वाले व्यय की राशि को 7500 रू0 तक सीमित किया गया है। ।
विभाग द्वारा जिला में चलाई जा रही औद्योगिक गतिवििधयों से जहां औद्योगिक क्षेत्र का तीव्र गति से विकास हुआ है वहीं हजारों परिवारों को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हुए हैं। निश्चित रूप से विभाग द्वारा औद्योगिक क्षेत्र की दिशा में किए जा रहे प्रयास रंग ला रहेे हैं तथा वह दिन दूर नहीं जब जिला बिलासुपर का नाम प्रदश्ेा के औद्योगिक नक्शे पर एक अग्र्रणी जिला के रूप में लिखा जाएगा और अधिकतर औद्योगिक घराने उद्योग लगाने के लिए इस जिला की ओर अपना रूख करेंगे।

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