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औंधे मुंह गिरेगा कच्चा तेल बाजार

p11-14-300x249लंदन— तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक के इस सप्ताह वियना में होने वाली बैठक में उत्पादन में कटौती करने पर सहमति नहीं बनी तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत गिरकर 60 डालर प्रति बैंरल पर आ सकती है। वहीं, दूसरी ओर अगर कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 60 डालर प्रति बैरल तक लुढ़का तो भारत में पेट्रोलियम पदार्थों के घटने के आसार है। डीलरों के मुताबिक इस वर्ष जून से अब तक तेल की कीमत 34 प्रतिशत गिरकर चार साल के निचले स्तर 76.76 डालर प्रति बैरल पर आ चुकी है तथा यदि ओपेक बैठक में तेल उत्पादन में 10 लाख बैरल प्रतिदिन की कटौती पर सहमति नहीं बनी तो इसके दाम और नीचे आ सकते हैं। उन्होंने बताया कि अगर कटौती नहीं की गई तो बाजार में ओपेक और वैश्विक तेल बाजार पर उसके प्रभाव की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं। अमरीकी शेल ऑयल को छोड़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति बढ़ने और मांग कमजोर पड़ने की वजह से जून से तेल की कीमत में गिरावट देखी जा रही है। गौरतलब है कि तेल की कीमत में कमी आने से ओपेक के सदस्य देश अपना बजट संतुलित करने के लिए जूझ रहे हैं। वैश्विक स्तर पर दाम 80 डालर प्रति बैरल से नीचे आने वेनेजुएला, लीबिया और इक्वाडोर जैसे देशों का बजट प्रभावित हो रहा है और वह उत्पादन में कटौती करने पर दबाव बनाए हुए है, जबकि ओपेक का सबसे बड़ा निर्यातक देश सऊदी अरब इसके पक्ष में नहीं हैं।

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