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एक चपरासी बन गया सॉफ्टवेयर कंपनी का मालिक

2014_11image_10_14_271988000chotusharma-llचंडीगढ़: एक चपरासी ने कामयाबी की ऐसी मिसाल पेश की है जिसे सुन कर आप उन पर गर्व महसूस करेंगे। चंडीगढ़ के छोटू शर्मा दिन में एक दफ्तर में चपरासी की नौकरी करते और रात को भूखे पेट जाग कर पढ़ाई करते और नतीजा यह निकला की आज छोटू चंडीगढ़ में दो सॉफ्टवेयर कंपनियों का मालिक है। हिमाचल प्रदेश के एक गांव में जन्मे छोटू ने सरकारी कॉलेज से बीए पास की लेकिन इसके बावजूद उन्हें कोई नौकरी नहीं मिली। नौकरी की तलाश में छोटू चंडीगढ़ जा पहुंचा लेकिन वहां भी किसमत ने साथ नहीं दिया। तब छोटू ने फैसला किया कि कंप्यूटर कोर्स करके कंप्यूटर के बल पर ही कैरियर बनाना है। पेट भरने के लिए उसने एक स्थानीय कंप्यूटर सेंटर ‘एपटेक’ में चपरासी की नौकरी कर ली। इसी के साथ उसने कंप्यूटर क्लास भी ज्वाइन कर ली। वो दिन भर कंप्यूटर सेंटर में चपरासी का काम करता और रात को जागकर पढ़ाई करता। छोटू दिन भर कंप्यूटर सेंटर में रहता, जैसे ही कोई कंप्यूटर खाली मिलता, छोटू उस पर प्रैक्टिस शुरू कर देता। दिन भर कंप्यूटर सेंटर में रहने के कई फायदे हुए। नौकरी के साथ साथ छोटू अपने कोर्स की प्रैक्टिस भी करता और वहां प्रैक्टिस कर रहे छात्रों को भी कंप्यूटर कोर्स की बातें सिखाता। एक तरफ छोटू ने माइक्रोसॉफ्ट सर्टिफाइट सॉफ्टवेयर डेवलपर का कोर्स पूरा किया। दूसरी तरफ उसे एपटेक कंप्यूटर सेंटर में ही बतौर फैकल्टी टीचर छात्रों को पढ़ाने का प्रस्ताव मिला। छोटू का संघर्ष और मेहनत रंग लाने लगी और कम ही समय में डॉट नेट की टीचिंग में छोटू का नाम चंडीगढ़ में छा गया। 2007 में उसने चंडीगढ़ में कई स्थानों पर CS इन्फोटेक के नाम से इंस्टीट्यूट खोल लिए। चंडीगढ़ में CS Infotech में 1000 से ज्यादा स्टूडेंट कंप्यूटर शिक्षा ले रहे हैं। 2009 में छोटू ने मोहाली में जमीन खरीद कर अपनी सॉफ्टवेयर कंपनी खोली। आज CS Soft Solution  में 125 से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे हैं। ये कंपनी बड़ी बड़ी कंपनियों को सॉफ्टवेयर सेवाएं मुहैया कराती है। छोटू के अधिकतर छात्रों को 500 करोड़ के टर्नओवर वाली कंपनियों में अच्छे खासे पैकेज पर नौकरी मिलती है। उनके छात्रों को माइक्रोसॉफ्ट, एकेंचर, टीसीएस और इन्फोसेस जैसी कंपनियों में नौकरी मिली। 
चंडीगढ़ में छोटू शर्मा को ‘गुरु ऑफ माइक्रोसॉफ्ट टैक्नोलॉजी’ कहकर बुलाया जाता है। छोटू शर्मा के संघर्ष और मेहनत के चलते 2007 में हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने उन्हें हिमाचल गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया था।

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