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ऊहल प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन ने दूसरे दिन भी किया धरना प्रर्दशन

मंडी, 13 जुलाई (पुंछी) :सीटू से संबंधित ऊहल प्रोजेक्ट वर्कर्स यूनियन ने अवीर कंपनी द्वारा किये गये गैर कानूनी ले ऑफ के खिलाफ शनिवार को खुद्दर स्थित कंपनी कार्यालय के बाहर दूसरे दिन भी धरना दिया। लेकिन जब सुबह ही मजदूर कार्यालय पहुंचे, तो कंपनी के अधिकारी पहले से ही कार्यालय पर ताला लगाकर वहां से रफूचक्कर हो गये थे। इसके बाद यूनियन के नेताओं नारायण दास, पवन सेन, रमेश चंद, प्रताप चंद, धर्मवीर, भीम सिंह, तिलक राज, विजय, संजय, जोगिन्दर, अशोक, कमलेश, कर्मू, होशियार, कमेर, बिट्टू, राजेश, यादव, विकास सहित मच्छयाल साइट के लगभग 50 मजूदूरों ने कंपनी कार्यालय के बाहर धरना दिया। वहीं खद्दर साइट पर भी बिजली बोर्ड के कार्यालय के बाहर टेक सिंह, बुद्वि सिंह, चमन, राकेश, रणजीत, विजय आदि के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया। टेक सिंह, नारायण दास व पवन सेन ने कहा कि जब तक गैर कानूनी ले ऑफ रद्द नहीं होता है, वे संघर्ष जारी रखेंगे। हिमाचल किसान सभा के मंडी जिला सचिव कुशाल भारद्वाज ने कंपनी अधिकारियों द्वारा कार्यालय में ताला ज$डकर गायब होने की क$डे शब्दों में निंदा की है। उन्होंने बीवीपीसीएल प्रबंधन से मांग की कि अबीर कंपनी के खिलाफ क$डी कार्यवाही की जाए तथा इस तरह की हरकत के लिए कंपनी को ब्लैक लिस्ट किया जाए। उन्होंने ने मांग की कि प्रधान नियोक्ता होने के नाते बीवीवीसीएल प्रबंधन मजदूरों के जून महीने के वेतन का भुगतान करे तथा डिवाटरिंग करने वाले जिन मजदूरों को पिछले तीन महीने का वेतन नहीं मिला है, उन्हें भी शीघ्र वेतन की अदायगी करे। मजदूरों का जो भी देय है बोर्ड उसका शीघ्र भुगतान करे। उन्होंने कहा कि यह दुर्भायपूर्ण है कि इस प्रोजेक्ट में आज तक जो भी कंपनियां आई उन्होंने मजदूरों के हक-हकूकों पर डाका डालने के साथ-साथ प्रदेश के खजाने में भी अरबों रूपये का नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि जो प्रोजेक्ट 2009 में बनकर तैयार होना था, वह सन 2017 तक भी बनता नजर नहीं आ रहा है। इससे जहां प्रोजेक्ट की उत्पादन लागत ब$ढ रही है वहीं बिजली उत्पादन से जो प्रदेश को आज तक राजस्व प्राप्त होना था, उससे भी वंचित रहना प$ड रहा है। उन्होंने प्रदेश सरकार से भी मांग की कि प्रोजेक्ट निर्माण को जल्दी पूरा करने के लिए ठोस कदम उठाये जाएं। उन्होंने कहा कि तय समय से 6 साल बाद जब प्रोजेक्ट की सुरंग निकली तो अफसरों, ठेकेदारों से लेकर राजनेताओं तक सभी में श्रेय लेने की हो$ड लग गई थी, लेकिन किसी ने यह नहीं कहा कि सुरंग निकालने में ही 6 साल का अतिरिक्त समय क्यों लग गया। और अब जब मजदूरों के हकों पर डाका डाला जा रहा है तो कोई मजदूरों के पक्ष में बोलने वाला नहीं है।

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