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आलू उत्पादन में चुनौतियों से निपटपने के लिए सघन अनुसंधान की आवश्यकता: राज्यपाल

राज्यपाल श्रीमती उर्मिला सिंह ने आज यहां इंडियन पोटेटो एसोसिएशन (आईपीए)
तथा केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई), शिमला के संयुक्त
तत्वावधान में ‘एमरजिंग प्रोब्लमज आॅफ पोटेटो’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय
कार्यशाला का शुभारम्भ किया।
राज्यपाल ने आलू उत्पादन को लेकर आ रही चुनौतियों से निपटने के लिए सघन
अनुसंधान की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आलू की फसल में होने
वाले विभिन्न रोगों को चिन्हित करने की आवश्यकता है। इसके अलावा, आलू की
फसल को मौसम में बदलाव से होने वाले प्रभावों से सुरक्षित करने तथा आलू
की नई किस्मों को विकसित करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि आधुनिक तकनीकों को अपनाकर आलू के उत्पादन को बढ़ाया जा
सकता है। इसके लिए बायोटेक्नोलोजी, नेनो टेक्नोलोजी, प्रेसिजन फार्मिग
इत्यादि आधुनिक तकनीकों को अपनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आलू की फसल
देश की खाद्य जरूरतों को पूरा करती है। ऐसे में वर्ष 2050 तक इसके उत्पादन
को 150 मिलियन तक बढ़ाने की आवश्यकता है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए और
परिश्रम और प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
श्रीमती उर्मिला सिंह ने बीज उत्पादन को बढ़ाने के अतिरिक्त आलू की खेती के क्षेत्र
विस्तार पर भी बल दिया ताकि उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग को पूरा किया जा
सके। उन्होंने आलू, जो देश की मुख्य फसलों में शामिल नहीं है, की विभिन्न
किस्मों को भारतीय जलवाुय के अनुरूप विकसित करने के लिए सीपीआरआई के
प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्थान के वैज्ञानिकों तथा किसानों
के योगदान से देश आलू उत्पादन में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है।
राज्यपाल ने डा. जीवनलता, डा. रविन्द्र, डा. बास्वराज, डा. एस.के. चक्रवती और डा.
बीरपाल सिंह को ‘आईपीए कौशल्या पुरस्कार’ से सम्मानित किया। पुरस्कार के तौर
पर उन्हें प्रशस्ति पत्र और 20,000 रुपये नकद पुरस्कार प्रदान किए गए। उन्होंने
आलू अनुसंधान में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए डा. जगेश तिवारी को 10 हजार
रुपये का ‘चंद्रप्रभा युवा वैज्ञानिक पुरस्कार’ भी प्रदान किया। ये पुरस्कार आलू
अनुसंधान में उल्लेखनीय योगदान के लिए क्रमशः चार वर्ष में एक बार और दो
वर्ष में प्रदान किए जाते हैं।
श्रीमती उर्मिला सिंह ने इस अवसर पर सीपीआरआई द्वारा प्रकाशित स्मारिका तथा कम
लागत में आलू उत्पादन, आलू की भारतीय किस्में और उनकी विशेषताएं
तथा ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई के माध्यम से आलू उत्पाद विषयों पर तीन
प्रकाशनों का विमोचन भी किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आईसीएआरआई के उप महानिदेशक श्री एन.के. कृष्णा
कुमार ने कहा कि कार्यशाला के दौरान अधिक क्षेत्र को आलू उत्पादन में लाकर
आलू बीज उत्पादन एवं आलू उत्पादन में वृद्धि के उपायों पर विचार विमर्श किया
जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों तथा किसानों के बीच आपसी समन्वय
विकसित कर आशातीत परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अनेक
प्रकार के विषाणु फसल को नुकसान पहुंचाते हैं और इनसे फसल के बचाव के लिए
अनुसंधान की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य पर भी ध्यान दिया जाना
चाहिए क्योंकि इस पर ध्यान देकर उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान, नई दिल्ली के क्षेत्रीय निदेशक डा. जुलियन पार और
भारत सरकार के औद्यानिकी आयुक्त डा. एस. के. मल्होत्रा ने भी इस अवसर पर अपने
विचार व्यक्त किए। आईसीएआर-सीपीआरआई के निदेशक डा. बीर पाल सिंह ने राज्यपाल का स्वागत
किया। आईपीए के सचिव डा. एन.के. पांडे ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
आईसीएआर और सीपीआरआई के वैज्ञानिक, कृषि उद्योग तथा खेती बाड़ी से
जुडे़ प्रतिनिधियों तथा प्रदेश सरकार के अधिकारियों ने भी कार्यशाला में भाग लिया।

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