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आमदनी 15 करोड़ सालाना, पर रहने के लिए नहीं कोई ठिकाना

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ज्वालामुखी, 24 अप्रैल – विश्व विख्यात शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी मंदिर में सालाना लाखों भक्तों का आना-जाना लगा रहता है। ज्वालामुखी मंदिर की सालाना आय 15 करोड़ है, बावजूद इसके न्यास यात्रियों की सुविधा के लिए धर्र्थ सराय का निर्माण नहीं कर पाया है, जबकि अन्य सभी मंदिरों में यह सुविधा है। धर्माथ सराय बन जाने से जहां यात्रियों को वाजिब दाम पर कमरे मिलेंगे, वहीं साधु-संतों को भी सहूलियत मिलेगी। मंदिर न्यास की यह सबसे बड़ी कमजोरी रही है कि यहां पर न्यास की अपनी कोई धर्मार्थ सराय नहीं है। हालांकि मंदिर न्यास ने केंद्रीय पर्यटन विभाग के सहयोग से व बाबा नागपाल की आर्थिक मदद से यात्री निवास के रूप में एक सफेद हाथी जरूर बनाया था, जिसे कई बार किराए पर दिया गया, लेकिन वापस लेना पड़ा। मौजूदा समय में यहां एक अस्पताल को स्थानांतरित किया गया है। मंदिर का ही एक और सफेद हाथी एक करोड़ की लागत से बना दीप सत्संग भवन था, जिसे अब मैरिज पैलेस की शक्ल दी जा रही है। मंदिर व आसपास के क्षेत्रों को विकसित करने के लिए एक मास्टर प्लान बनाया गया है, परंतु इसे आज तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। स्थानीय विधायक संजय रतन का कहना है कि उन्होंने 200 करोड़ रुपए मास्टर प्लान के लिए स्वीकृत कराने के लिए प्रस्ताव भेजा है। मंदिर न्यास में 100 से अधिक कर्मचारी हैं, जिन पर लगभग 1.10 एक करोड़ खर्च आता है। मंदिर न्यास के सौजन्य से डिग्री कालेज ज्वालामुखी चलाया जा रहा है, जिस पर सालाना 60 लाख रुपए से अधिक का खर्चा आता है। एक अन्य संस्कृत कालेज भी मंदिर न्यास द्वारा चलाया जा रहा है, ताकि मां के चढ़ावे से शिक्षा का प्रचार व प्रसार हो सके। इसके अलावा मंदिर परिसर में एक औषधालय भी चलाया जाता है, जिसमें एक डाक्टर व सहायक तैनात है। न्यास वर्तमान में डेढ़ करोड़ से संस्कृत कालेज के भवन का निर्माण कर रहा है। सहायक मंदिर आयुक्त विनय कुमार का कहना है कि मंदिर न्यास का कर्त्तव्य है कि यात्रियों को हर संभव सुविधा दी जाए।

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