Header ad
Header ad
Header ad

आजाद इंटरनेटÓ पर सरकार से लेकर सोशल मीडिया तक बड़ी बहस

45नई दिल्ली। नेट न्यूट्रलिटी यानी नेट निरपेक्षता का तात्पर्य है कि सरकार और इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियां इंटरनेट पर सभी तरह के डाटा से समान व्यवहार करें। इसका मतलब उपभोक्ता, वेब सामग्री, वेबसाइट, ऐप या इंटरनेट सेवाओं को लेकर किसी प्रकार का भेदभाव या अनुचित लाभ किसी को न दिया जाए। किसी भी ऐप या वेब पेज को ब्लाक न किया जाए या अतिरिक्त शुल्क वसूल कर किसी अन्य को बढ़ावा न दिया जाए।
क्या मचा है बवाल
नेट न्यूट्रलिटी खत्म हुई तो टेलीकॉम कंपनियों से जुड़ी वेबसाइट और ऐप ही फ्री होंगे। कंपनियों का जिस वेबसाइट से करार नहीं होगा और यूजर्स उसे इस्तेमाल करना चाहे तो इसके लिए अतिरिक्त पैसे देने पड़ेगे। सोशल मीडिया पर लाखो युवा इसका विरोध कर रहे हैं।
सरकार से लेकर सोशल मीडिया तक सक्रियता
15 जनवरी को केंद्र सरकार नेटनिरपेक्षता पर दूरसंचार विभाग के तकनीकी सदस्य की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति बनाई।
27 मार्च को भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) का परामर्श पत्र जारी, 24 अप्रैल तक जनता से सुझाव मांगे गए।
06 अप्रैल को एयरटेल जीरो प्लान, 10 फरवरी को फेसबुक का इंटरनेटऑर्ग भारत में लांच, नेट यूजरों से भेदभाव के आरोप।
26 फरवरी को अमेरिका में नेट निरपेक्षता पर नए सिरे से दिशानिर्देश लागू हुए, चिली, नीदरलैंड और ब्राजील में पहले ही लागू।
समर्थन में सेव द इंटरनेट अभियान
नेट निरपेक्षता के समर्थकों ने सेव द इंटरनेट डॉट इन वेबसाइट के जरिये अभियान चलाया है। सोशल मीडिया पर भी हैशटैग के जरिये इसे लाखों लोगों का समर्थन मिला है।
1.5 लाख लोगों ने चेंज डॉट ऑर्ग के जरिये केंद्र सरकार तक पहुंचाया संदेश।

Share

About The Author

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Please Solve it * *

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)