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McDonald विवाद पर शिवसेना का सवाल, गरीबों के ‘अच्छे दिन’ कब?

default (7)नई दिल्ली: पुणे में एक गरीब बच्चे को मैकडॉनल्ड्स से बाहर निकाले जाने के मामले पर शिवसेना ने सवाल किया है कि देश में गरीबों के लिए ‘अच्छे दिन’ कब आएंगे? शिवसेना ने अपने मुखपत्र में लिखे एक संपादकीय लेख में कहा है, मैकडॉनल्ड्स प्रकरण देश में अमीर और गरीब के बीच के अंतर को दिखाता है। इस तरह की घटनाओं पर सिर्फ चर्चाओं से गरीब बच्चों की समस्या हल नहीं होगी और सिगनल, रेलवे स्टेशन या रेस्त्रा के बाहर इसी तरह गरीब बच्चे खड़े मिलते रहेंगे। अपने लेख में शिवसेना ने भाजपा के चुनावी नारे की ओर इशारा करते हुए लिखा है कि इन बच्चों का क्या होगा? इनके ‘अच्छे दिन’ कब आएंगे? शिवसेना ने आरोप लगाया कि कुछ स्वार्थी नेताओं के कारण अमीर और गरीब के बीच की खाई कभी कम नहीं हुई, जिस वजह से गरीब लोगों को लगातार शोषण झेलना पड़ता है। शिवसेना ने कहा कि ऐसा कोई नियम नहीं है, जो सड़क पर रहने वाले गरीब बच्चे को महंगे रेस्त्रां में दाखिल होने से रोकता हो, लेकिन इसके बावजूद गरीब लोगों को ‘वड़ा पाव’ खाकर ही अपनी भूख मिटानी पड़ती है। शिवसेना ने कहा कि मैकडॉनल्ड्स मामले में बच्चे के पास भोजन खरीदने के पैसे नहीं थे। कोई व्यक्ति उसे खुश करने के लिए पैसे देने को तैयार था। इसके बावजूद उसे यह कहते हुए बाहर निकाल दिया कि यह जगह ऐसे लोगों के लिए नहीं है। यह घटना देश के लोगों की गरीब बच्चों के प्रति सोच को दर्शाती है। गौरतलब है कि पुणे में एक महिला बच्चे को फैंटा फ्लोट दिलवाने के लिए उसे अपने साथ मैक्डॉनल्ड ले गई, लेकिन कर्मचारी ने उसे बाहर निकाल दिया गया। बता दें कि मैकडॉनल्ड्स ने मामले की जांच की बात कही है और इस घटना में संलिप्त सुरक्षाकर्मी को भी निलंबित कर दिया है।

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