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5 दिनों से अनशन

मंडी, 21 अक्तूबर (पुंछी): आम आदमी पार्टी नें जिला बिलासपुर के बरमाणा में सिमेंट पलांट के पभावितों की मांगों को लेकर पिछले 5 दिनों से अनशन कर रहे अमरजीत और उनके साथियो पर पुलिस द्वारा बर्बरता से किए गए लाठी चार्ज को लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। पिछले पांच दिनों से स्वयं अनशन पर रहे पार्टी सरकार हमारी जमीनें छीनकर नदियों और पहाड़ो जैसे मुल्यवान संसाधनों को अवैज्ञानिक ढंग से बिजली व सिमेंट जैसे कारखानेदार कम्पनियों को दे रही है। वे टनल, डैम और बिजली तारों के जंजाल बिछाकर, अरबों खरबों का मुनाफा कमा रही है। उपर से बिजली पानी की दरों में बेतहासा वृद्घि करके, हिमालयवासियों के वनाधिकार, स्वावलंबन व स्वरोजगार का स्थाई धरती व जल संसाधन छीनकर, पर्यटन व पर्यावरण से खिलवा$ड कर रही है। ग्लोबल वार्मिंग। खनन और बांध बनने से जल व मृदा के भार विस्थापन व भण्डारण से उपजी भूकम्पीय तरंगों। हिमालय के दोहन खनन में पयुक्त पथम व द्वितीय विश्वयुद्घों से भी अधिक गोला बारूद व विस्फोटों के धमाकों के आतंक से वन्यपाणियों के आवास को भी छीन लिया। दहल उठे, इन वन्यपाणियों के आवास व आजीविका असंन्तुलन से वे उनके परमाश्रयी मनुष्यों के समीप गांव व शहर में आश्रय व अस्तित्व की तलाश में लौट आये हैं और लोगों पर हमले व किसानों की फसलें उजाड़ रहे है। गत 5 मई को मंडी में बन्दरों के हमले से घायल मंडी कालेज की छात्रा निशा के इलाज बन्दरों के आतंक व बेकाबू यातायात से मुक्ति के लिए आम आदमी पार्टी कार्यकर्ता देशराज शर्मा का मंडी में अनिशचितकालीन अनशन और साथियों का धरना चौथे दिन में प्रवेश कर गया। लेकिन सरकार मुकदर्शक बनी हुई है। आम आदमी पार्टी जिला बिलासपुर प्रवक्ता राज वर्मा ने जारी विज्ञप्ति में यह जानकारी दी। उन्होने बताया कि छात्रा की हालत पी.जी.आई. चंडीगढ़ में नाजुक बनी हुई है। अनशन पर बैठे देशराज शर्मा की मांग है कि घायल छात्रा का कम से कम इलाज तो करवाओ।पार्टी के दखल के बाद निशा का इलाज 9 दिनों के बाद पिछले कल शुरू हुआ। निशा ने खाना पीना भी छो$ड दिया है, उसकी नजर चली गई है, सिर में इन्फेक्शन ब$ढ गया है। डाक्टरों का कहना है कि उसकी सिर की हडडी का बेस टूट चुका है जिससे स्थिती जटिल बनती जा रही हैै। उन्होने बताया कि पार्टी के मंडी जिला सचिव कैप्टन जगदीश साथियों सहित निशा के परिजनों की मदद के लिए पी.जी.आइ. पहुंचे हैं। आम आदमी पार्टी की मांग है कि वन्यपाणी आंतक को आपदा घोषित कर पभावितों व किसानों को मुआवजा तथा समस्या के स्थाई समाधान के लिए प्रदेश भर में अभियान चलाए। पार्टी का कहना है कि वन्यपाणी आंतक की ज$ड अवैज्ञानिक ढंग से बिजली व सिमेंट कारखानों के टनल, डैम आदि के दोहन खनन में पयुक्त पथम व द्वितीय विश्वयुद्घों से भी अधिक गोला बारूद व विस्फोटों के धमाकों के आतंक से वन्यपाणियों ने बस्तियों की ओर रूख किया। पदेश भर में बन्दर, सूअर, नील गाय, जैसे वन्यपाणी और लावारिस गऊयें ब$डे पैमाने पर किसानों की फसलों को दिन-रात उजा$ड रहे हैंं। लोगों पर हमले कर रहे हैं। पिछले कई वर्षों से तबाह हो चुके किसान और नगरवासी वन्यपाणी आंतक से नीजात दिलानें की गुहार लगा रहे है। लेकिन सरकार द्वारा कोइ गम्भीर कदम उठानें की बजाये, सरकार, हिमाचल के किसानों, छोटे दुकानदारों व व्यापारियों को तबाह करने के लिये एफ.डी.आइ.( पत्यक्ष विदेशी निवेश ) लाने में लगी है।
समाधान:- पार्टी का मानना है कि स्थाई समाधान के लिए, लोगों के साथ विशेषज्ञों, वन, कृषि, बागवानी विभाग, पुलिस, होमगार्ड , आपदा प्रबन्धन दस्तों, अन्य संस्थाओं के साथ संयुक्त लक्ष्य भेदक मिशन के तहत वन्यपाणियों को उनके आवास सघन वनों की ओर खदेडक़र वहां इनकी सतत जैविक विकास पक्रिया का सृजन व संवर्धन कर विदेशों की तरह इन वन्यपाणियों का पर्यटन गतिविधियों में सहयोग लेकर हजारों स्थानीय बेरोजगार नौजवानों को सम्मानजनक रोजगार देकर जैविक संतुलन बनाया जाये। लावारिस गंऊओं को वापिस गौशाला में पुनर्वासित करने के लिए समुचित अनुदान देकर पत्येक किसान परिवार को एक-एक लावारिस गाय सौंपी जाये। वन विभाग के तमाम कार्यालय शहरों व कस्बों से हटाकर संघन वन क्षेत्रों के आसपास स्थापित किए जाये। जिससे वनों व वन्यपाणी संरक्षण हो सके।
पिछले दस वर्षों के कुशासन के दौरान 7445 लोग स$डक हादसों में मारे गये, तथा 53000 से अधिक लोग घायल हुए। 573 करो$ड के घाटे में चल रहा परिवहन मंत्रालय और इस के मातहत चल रहा बेलगाम निजी बसों का बे$डा किस तरह से हजारों निर्दोष मासुमों से आए दिन उनके अपनों को बेमौत छीनकर पदेश के पत्येक हिस्से में मातम का कोहराम है। लेकिन हरबार, नेता एक ब्यान देकर पल्ला झा$ड लेते है। सरकार चंबा, पालमपुर और अब मंडी के झी$डी जैसे भीषण बस हादसों में यातायात कुपबंधन के लिए जिम्मेदार परिवहन मंत्री तथा अधिकारियों का इस्तीफा ले। सरकार स$डक दुर्घटना नियंत्रण जांच आयोगों की शिफारिसों व सुझावों को लागु करे। रोजगार के साथ हताहत दिवंगतों के परिजनों को पांच लाख व घायलों को एक लाख राहत राशी दी जाए।

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