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225 वर्षों से चल रहा सुजानपुर होली उत्सव् बना उल्लास का प्रतीक

sujanpurधर्मशाला (अरविन्द ) 12 मार्च

225 वर्षों से चल रहा सुजानपुर  होली उत्सव् बना  उल्लास का प्रतीक

संस्थापक महाराजा संसार चंद ने अनेक कलात्मक मंदिरों का भी निर्माण किया

इस बार 13 मार्च से होली उत्सव अपनी छटा बिखेरेगा

 

 धार्मिक विश्वास एवं पुरातन संस्कृति और उल्लास की पहचान बन चुके हिमाचल के हमीरपुर जिला के सुजानपुर के होली उत्सव को लेकर इतिहास के पन्नों पर कई स्वर्णिम अध्याय लिखे जा चुके हैं। सुजानपुर के होली उत्सव से ही पूरे देश में हमीरपुर जिला की एक अलग सांस्कृतिक पहचान बनी है। लगातार 225 वर्षों से इस होली उत्सव् के माध्यम से समाज में सद्भाव, आपसी भाईचारे का संदेश दिया जा रहा है और जिला के लोग भी बेसब्री से सुजानपुर के होली उत्सव का इंतजार करते हैं, इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सुजानपुर की होली का गुलाल लोगों के दिलों पर उत्साह और उल्लास के रूप में पूरी तरह से चढ़ गया है। इस बार 13 मार्च से सुजानपुर के ऐतिहासिक चौगान में होली उत्सव अपनी छटा बिखेरेगा।

महाराजा संसार चंद 1775 से 1823 के शासन काल में सुजानपुर टीहरा में होली उत्सव का आगाज हुआ जिसे ब्रजभूमि की होली की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के आधार पर श्रद्धा व उल्लास से मनाया जाने लगा। अपने शासनकाल में ही महाराजा संसार चंद ने अनेक कलात्मक मंदिरों का निर्माण किया जिनमें सुजानपुर टीहरा मुरली मनोहर मंदिर,गौरी शंकर मंदिर व नर्वदेश्वर मंदिर प्रमुख हैं। नर्वदेश्वर मंदिर

भित्ति चित्रों की शिल्प कला के कारण प्रदेश में पुरातात्विक महत्व का विशिष्ट कलात्मक मंदिर है। नगर के कोने में व्यास नदी के बांये किनारे स्थित यह मंदिर कांगड़ा कलम का जीवंत व अनुपम उदाहरण है। मंदिर की दीवारों पर पौराणिक आख्यानों पर आधारित चित्रों का चित्रण हुआ है यद्यपि काल के प्रभाव से ये चित्र फीके पड़ गए हैं फिर भी तत्कालीन राजा के शासनकाल की कलानिष्ठा को अभिव्यक्त करते हैं उनके दरबार में बहुत चित्रकार थे लेकिन इन चित्रों उत्कीर्ण करने में भणकू व भलकू के नाम प्रमुख रहे हैं।

मंदिर परिसरों में अन्य मंदिर जैसे शिवलिंग, गुंबाकार लघु मंदिर, सूर्य मंदिर,गणपति, दुर्गा-भवानी और राधा माधव की मूर्तियां प्रतिष्ठित हैं। मंदिर की दीवारों पर चढऩे के लिए सीडियां  लगाई गई हैं ताकि उंचाई से कांगड़ा घाटी के नैसर्गिक सौंदर्य का आनंद लिया जा सके। सुजानपुर नगरी के चप्पे चप्पे में कलाओं की सुंगध बिखरी है और ऐसी जगह पर होली के गुलाल का उल्लास लोगों की स्मृतियों में कई जादुई अनुभूतियां दर्ज कर देता है। सच में होली उत्सव के माध्यम से हमीरपुर जनपद ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में कामयाबी हासिल कर ली है और यथार्थ में ही देवभूमि होने का गौरव प्राप्त किया है।

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