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11 सितम्बर को जोगिन्दर नगर और 12 को पद्दर में हिमाचल किसान सभा जोगिन्दर नगर क्षेत्रीय कमेटी करेगी धरना-प्रदर्शन

मंडी, 9 सितम्बर (पुंछी): हिमाचल किसान सभा की जोगिन्दर नगर क्षेत्रीय कमेटी ने किसानों की मांगों पर प्रदेश सरकार और प्रशासन द्वारा गंभीरता से अमल न करने का कड़ा नोटिस लेते हुए 11 सितम्बर को जोगिन्दर नगर और 12 सितम्बर को पधर में धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में हिमाचल किसान सभा ने तैयारियां भी षुरू कर दी हैं। इसी कड़ी में पिछले कुछ दिनों से हिमाचल किसान सभा के राज्य सहसचिव कुशाल भारद्वाज के नेतृत्व में चौंतड़ा-टिक्करी मुशैहरा, मच्छयाल, चल्हारग, घमरेहड़ आदि क्षेत्रों में बैठकें आयोजित की गई हैं। जबकि जोगिन्दर नगर कमेटी के उपप्रधान किशोरी लाल के नेतृत्व में पस्सल में, लडभड़ोल तहसील कमेटी के प्रधान टेक सिंह व सचिव प्रताप के नेतृत्व में खद्दर व तुल्लाह क्षेत्र में, प्रेम सिंह के नेतृत्व में चौहार क्षेत्र में तथा रविकांत के नेतृत्व में कमांद क्षेत्र में बैठकें आयोजित की गई हैं। किसान सभा के वरिश्ठ नेता कुषाल भारद्वाज ने कहा कि एसडीएम महोदय द्वारा टिक्करी सडक़ को 15 दिन में खुलवाने का आष्वासन दो महीने बाद भी पूरा नहीं हुआ है। धार पंचायत के चिम्हणू वार्ड में 15 महीने से खाली पड़े वार्ड सदस्य के चुनाव अगस्त माह में करवाने का वायदा भी पूरा नहीं हुआ है। चौहारघाटी के किसानों से छीनी लीज के नाम पर कंपनियों द्वारा छीनी गई जमीन का पैसा किसानों को नहीं दिया गया है वहीं प्रोजेक्ट निर्माण के लिए हुई खुदाई के चलते खेतों, घासणियों, रास्तों, पुलियों व घराटों को हुए नुकसान का भी मुआवजा नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि र्आआईटी कमांद में रोजगार के मामले में स्थानीय लोगों की अनदेखी हो रही है। इसी तरह बादल फटने, भारी बारिष व भूस्खलन आदि से कोलंग, चनेहड़, जिमजिमा, कुनडूनी, उरला, कुफरी, द्रंग, चौहारघाटी व अन्य क्षेत्रों में जो भारी नुकसान हुआ है, उसका उचित मुआवजा भी किसानों को नहीं मिला है।उन्होंने कहा कि आधे से ज्यादा पंचायतें ऐसी हैं जहां इस वित्तीय वर्श में मनरेगा का काम षुरू ही नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत काम मांगने के 15 दिन के अंदर काम मिलने और एक साल में 100 दिन के काम की कानूनी गारंटी की तो पूरे जिला में ही धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कुषाल भारद्वाज ने कहा कि इसके बाद लगातार दो-तीन महीने फसल और घास कटाई का काम रहता है, यदि तब कामगारों को काम के लिए बुलाया जाएगा तो फिर उनका खेती का काम प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि इसी लिए मनरेगा में यह प्रावधान है कि कामगार जब भी काम के लिए आवेदन करेंगे तो 15 दिन के अंदर उन्हें काम देना ही होगा।कुषाल भारद्वाज ने कहा कि जंगली जानवरों विषेशकर बंदरों व सूअरों ने किसानों की सारी फसल चौपट कर दी है, लेकिन इन उत्पाती जानवरों से फसल बचाने और नश्ट फसल का किसानों को उचित मुआवजा देने बारे सरकार ने कोई ठोस नीति नहीं बनाई है। अत: 11 सितम्बर को जोगिन्दर नगर तथा 12 सितम्बर को पधर में एसडीएम कार्यालयों का घेराव किया जाएगा तथा अलग-अलग इलाकों के किसानों की ठोस समस्याआें बारे प्रदेष के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी दिये जाएंगे।

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