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हिमाचल प्रदेश की दिन प्रतिदिन खराब होती वित्तीय स्थिति के लिए कांग्रेस पार्टी जिम्मेदार :माकपा

मंडी, 6 सितम्बर (पुंछी): मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी हिमाचल प्रदेश की दिन प्रतिदिन खराब होती वित्तीय स्थिति पर चिंता व्यक्त करती हैं और इसके लिए कांग्रेस पार्टी को जिम्मेवारी मानती हैं। वर्तमान में प्रदेश के प्रति व्यक्ति पर 41,139 /- रूपये का ऋण है जो देश में सबसे अधिक हैं। प्रदेश सरकार को अपनी कुल आय का 39 प्रतिशत हिस्सा अपनी देनदारियां चुकाने के लिए देना प$ड रहा है। जो अन्य राज्यों में लगभग 21 प्रतिशत हैं। माकपा के जिला सचिव भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार केन्द्र से हिमाचल प्रदेश के लिए १४वें वित्त आयोग से अतिरिक्त सहायता राशि लेने में भी नाकामयाब रही हैं। जबकि कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश वासियों से चुनाव पूर्व वादा किया था कि यदि वे सत्ता में आये तो केन्द्र से प्रदेश के लिए ज्यादा वित्तीय सहायता हासिल करेंगें जिसमें वे पूरी तरफ विफल रहे हैं। इसी के चलते प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों की कुमीटिड पैंशन को 40 से घटाकर 20 प्रतिशत करने की योजना बनाई हैं। प्रदेश सरकार के कुल बजट का 32 प्रतिशत कर्मचारियों के वेतन, 13 प्रतिशत पैंशन, 12 प्रतिशत लिये गये ऋण का ब्याज चुकाने, 9 प्रतिशत ऋण की किस्तें वापिस करने पर खर्च होता हैं और केवल 36 प्रतिशत बजट ही विकास कार्यो पर खर्च हो रहा हैं। जिसके चलते आम आदमी की समस्यायें लगातार ब$ढ रही क्योंकि उनके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, बिजली, खाद्यान और कृषि सम्बन्धी जरूरतों के लिए सरकार जरूरत के अनुसार बजट उपलब्ध नहीं करवा रही हंै। उन्होने कहा कि राज्य सरकार द्वारा केन्द्र सरकार के योजना आयोग के साथ हस्ताक्षरित किये गये एमओयू के अनुसार कर्मचारियों के वेतन पर कुल बजट का 35 प्रतिशत से अधिक खर्चा नहीं होना चाहिए। जिसके चलते सरकार अब प्रदेश में किसी को भी रैगुलर रोजगार नहीं दे रही हैं बल्कि कम वेतन पर अनुबंध पर नियुक्तियां दे रही हैं। इसलिए माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी काग्रेंस की राज्य व केन्द्र सरकार की हिमाचल प्रदेश के साथ १४वें वित आयोग के तहत दी जाने वाली अपर्याप्त वित्तीय सहायता की निंदा करती हैं। क्योंकि 14 वें वित आयोग ने देश के दूसरे राज्यों की सहायता राशि में १२६ प्रतिशत तक ब$ढौतरी की है परन्तु हिमाचल की सहायता राशि में केवल 51 प्रतिशत ही वृद्घि की गई है जो केन्द्र सरकार का हिमाचल के प्रति भेदभावपूर्ण रवैये को दर्शाता हैं और कांग्रेस नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार अपना वाजिब हक न ले पाने की कमजोरी को दर्शाता हैंं माकपा की मांग है कि हिमाचल प्रदेश के संसाधनों व आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुये प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देकर वित्तीय सहायता ब$ढाई जाये अन्यथा प्रदेश में वित्तीय सकंट ब$ढेगा और जनता की समस्याओं में भी वृद्घि होगी।

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