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हिमाचल के स्कूलों में भाषा अध्यापकों का टोटा लगभग हर दुसरे स्कूल में इस विषय का अध्यापक नहीं

पुरानी टेट परीक्षा पर रखे जाये भाषा अध्यापक : बेरोजगार अध्यापक
धर्मशाला (अरविन्द शर्मा )
हिमाचल में हिंदी तथा संस्कृत अध्यापकों की स्कूलों में भारी कमी है ,लगभग हर दुसरे स्कूल में इस विषय का अध्यापक नहीं हैI चूंकि हिंदी/संस्कृत बोर्ड परीक्षाओं में अनिवार्य विषय है I अतः उन बच्चों को खुद ही इस विषय की तैयारी करनी होती है जहा इस विषय के अध्यापक मौजूद नहीं है I जहाँ सरकार , प्रदेश के सरकारी स्कूलों में छात्रों को हर संभव सहूलतें प्रदान कर रही है वहीँ छात्रों को हिंदी/संस्कृत के अध्यापक भी उपलभध करवाने होंगे I प्रदेश की पिछली सरकार ने इस विषय में प्रशीक्षित अध्यापकों कीभर्ती परीक्षाएं लीं थी I ऊनि के आधार पर भर्ती अथवा नयी परीक्षाएं ली जनि चाहिए ताकि विद्यार्थियों को नुक्सान न हो I
हिमाचल प्रदेश के शिक्षा विभाग द्वारा भाषा अध्यापकों के 550 रिक्त पदों के लिए अध्यापक पात्रता परीक्षा (टेट),11 दिसंबर 2011 को आयोजित करवाई गई थी। इस परीक्षा को 2946 अभ्यर्थियों ने पास भी किया था परंतु इतना समय गुजर जाने के पश्चात आज तक इसकी भर्ती की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया। यह बात काँगड़ा जिला के परीक्षार्थी केवल, देवेंदर, कमलेश, अंजू बाला, हर्ष, खेम कुमार, सुरेश चौधरी, कमल कान्त, विनोद बिल्लू,आक्षे तथा लाली ने वीरवार को धरमशाला में कही I उन्होंने जिलाधीश के माध्यम से मुख मंत्री तथा नीरज भारती संसदीय सचिव को प्रार्थना पात्र भी भेजा I इन बेरोजगार युवाओं ने बताया की शिक्षा विभाग ने लगभग दो वर्ष पश्चात आज तक भर्ती के आर एंड पी रूल्ज निर्धारित नहीं कर पाया है I जिसके कारण अधिकांश स्कूलों में हिंदी विषय में अध्यापक न होने के कारण विद्यार्थियों की स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई है। यह प्रमुख कारण है की अभिभावक बच्चों की इस कमी को पूरा करने हेतु निजी स्कूलों की ओर अग्रसर होते जा रहे हैं। दूसरी ओर प्रदेश का प्रशिक्षित (भाषा )अध्यापक वर्ग भी इस महंगाई के दौर में बेरोजगारी में जीने को विवश है। अतः विभाग अभिभावकों का विश्वास, विद्यार्थियों का भविष्य तथा भाषा अध्यापकों की दयनीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए शीघ्र से शीघ्र आर एंड पी रूल्ज को अंतिम रूप देकर टेट पास भाषा अध्यापकों की नियुक्ति करे ताकि राष्ट्रीय भाषा हिंदी का सम्मान बरकरार रहे।

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