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हिमाचली रेल नेटवर्क को सांसदों से आस

शिमला, मोदी सरकार के रेल बजट में इस बार हिमाचल के भी बहुरंगे दिन आने की आस बंधी है। हिमाचल से भाजपा सांसदों के लिए यह किसी बड़ी अग्नि परीक्षा से कम नहीं होगा कि वे हिमाचल की बहुप्रतीक्षित रेल लाइनों के लिए बजट में प्रावधान करवाएं। सांसद शांता कुमार को एनडीए में अच्छा ओहदा दिया गया है। अनुराग ठाकुर भी पीछे नहीं हैं। सबसे ऊपर जेपी नड्डा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की कमान संभाल रहे हैं। भाजपा के इन सभी सांसदों से उम्मीदें बंधी हैं कि हिमाचल के विकास के लिए आवश्यक रेल नेटवर्क को वे अब सिरे चढ़वाएं। भले ही रेल मंत्रालय हिमाचल के किसी नेता के सुपुर्द नहीं रहा, मगर यह भी कम नहीं है कि नड्डा, शांता कुमार और अनुराग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए में अहम जिम्मेदारियां सौंपी हैं। हिमाचल में पिछले 15 वर्षों से भानुपल्ली-बिलासपुर-बरमाणा और प्रस्तावित लेह रेल लाइन का शोर सुना जा रहा है, मगर लेह तो दूर रही, भानुपल्ली-बिलासपुर के लिए ही पर्याप्त बजट नहीं मिल पाता। धार्मिक पर्यटन स्थलों व शक्तिपीठों को रेल नेटवर्क से जोड़ने का मुद्दा अब पुराना हो चुका है। प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए रेल मार्गों की महत्ता को नकारा नहीं जा सकता। ऐसा नहीं है कि हिमाचल सरकार केंद्र के समक्ष अपने हितों की जोरदार पैरवी करने में असफल रही हों। इससे पहले भी यूपीए-1 व यूपीए-2 के दौरान हिमाचल ने जोरदार मांग उठाई, मगर हमेशा हिमाचल को निराश ही होना पड़ा। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में हिमाचल का पलड़ा भारी है। सांसदों की संख्या भी पर्याप्त है। देखने वाली बात होगी कि इस बार हिमाचल की पुरानी आस पूरी होगी या फिर प्रदेश को झुनझुना ही थमाया जाएगा। प्रदेश के उद्योगपतियों, पर्यटन व्यवसायियों व बुद्धिजीवियों का कहना है कि यदि भावी रेल बजट में भानुपल्ली-बिलासपुर को पर्याप्त बजट मिल जाए, तो विकास में योजनाओं के दूरगामी नतीजे सामने आ सकते हैं।

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