October 22, 2017

‘हमारा जल हमारा जीवन’ विषय पर कार्यशाला आयोजित’

सोलन, ’जन सहभागिता के माध्यम से ही जल संरक्षण संभव: सीपी वर्मा’ अतिरिक्त उपायुक्त सीपी वर्मा ने कहा कि जल संरक्षण के लिए कार्यशालाओं का आयोजन ग्रामीण स्तर पर भी होना चाहिए ताकि जन सहभागिता के द्वारा जल की एक-एक बूंद का सदुपयोग सुनिश्चित हो सके। वर्मा आज यहां केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रालय के निर्देश पर आयोजित कार्यशाला को सम्बोधित कर रहे थे। यह एक दिवसीय कार्यशाला ‘हमारा जल-हमारा जीवन’ विषय पर केन्द्रीय जल आयोग शिमला और प्रदेश के सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई थी। अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि जल संरक्षण एवं जल के सदुपयोग को जीवन का अभिन्न अंग बनाना आवश्यक हो गया है। जनसंख्या के बढ़ते दबाव और शहरीकरण के कारण विभिन्न आवश्यकताओं के लिए पानी की उपलब्धत्ता घटती जा रही है। विभिन्न कारणों से भू-जल की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयास इस दिशा में तभी सफल हो सकते हैं जब जन सहयोग के साथ संरक्षण को सभी अपनाएं। सीपी वर्मा ने कहा कि लगभग सभी प्राचीन सभ्यताएं नदियों के किनारे ही विकसित हुई हैं और प्राचीन समय से ही जल संरक्षण के महत्व को समझा गया है। उन्होंने पंचायतीराज संस्थाओं के प्रतिनिधियों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों तथा छात्रों से आग्रह किया कि पानी के मूल्य को पहचानें और सभी को इस दिशा में जागरूक बनाएं। पानी की बर्बादी को न रोका गया तो इसका सीधा प्रभाव खाद्यान्न उत्पादन पर भी पड़ेगा और सभी को इसके गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने जि़ले के विभिन्न प्राकृतिक स्त्रोतो की नियमित सफाई करने तथा विभिन्न खड्डों एवं नालों में सिवरेज के खुले पाईप न छोड़ने और कूड़ा-कचरा न फैंकने का भी आग्रह किया। उन्होंने समस्त जि़ला वासियों से आग्रह किया कि वे अपने घरों एवं आसपास के क्षेत्रों में वर्षा जल संग्रहण के लिए टैंक, तालाबों आदि का निर्माण अवश्य करें ताकि इस जल का उपयोग पीने के अलावा अन्य कार्यों के लिये किया जा सके। सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग नाहन वृत के अधीक्षण अभियन्ता बीआर शर्मा ने कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि जल संरक्षण के लिए सभी को अपनी सोच बदलने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में प्रचुर मात्रा में शुद्ध जल उपलब्ध है और पानी के विभिन्न स्त्रोतों को सुरक्षित रखकर ही भविष्य में पानी की उपलब्धत्ता सुनिश्चित बनाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश में थिरूवनंतपुरम और कोटा ही ऐसे दो शहर हैं जहां नल के माध्यम से 24 घण्टे पानी उपलब्ध है। ऐसा इन शहरों में जन सहभागिता और जागरूकता के द्वारा ही संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में जल संरक्षण के लिए स्कूली स्तर पर भी छात्रों को जागरूक किया जाएगा। केन्द्रीय जल आयोग शिमला के अधिषाशी अभियन्ता पीयूष रंजन ने इस अवसर पर कहा कि 13 से 17 जनवरी, 2015 तक समूचे देश में जल सप्ताह मनाया जा रहा है। इस सप्ताह में देश और प्रदेश के विभिन्न जि़लों में लोगों को जल संरक्षण और उसके सदुपयोग के विषय में जानकारी दी जा रही है। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों से अपील की कि जल संरक्षण की दिशा में अपने महत्वपूर्ण सुझाव दें।

About The Author

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *