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सोलन में राइस पुलर के नाम पर लूट

7d1-11सोलन—सोलन जिला  में राइस पुलर होने की सूचना ने देश भर के वैज्ञानिकों और   खुफिया तंत्र के कान खड़े कर दिए हैं। राइस पुलर एक ऐसी चामत्कारिक  धातु है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कीमत करोड़ों रुपए बताई जा रही है।  यदि इस धातु का दुरुपयोग होने लगे तो यह काफी विनाशकारी भी साबित हो सकती है। इस एंटीक धातु की खरीद के लिए पंजाब से बीते दिनों  सोलन में कुछ लोग पहुंचे थे, लेकिन किसी वजह से यह डील नहीं हो पाई। जानकारी के अनुसार, गत शुक्रवार को शिमला के रहने वाले मौसम अली ने  पंजाब के रहने वाले सतपाल व राजेंद्र को जानकारी दी कि उसके पास एक ऐसा व्यक्ति है, जिसके पास राइस पुलर है। इसलिए वे इस राइस पुलर की खरीद के लिए कुनिहार आ जाएं। मौसम अली अपने साथियों को लेकर सोलन से गाड़ी में चल पड़ा। इन लोगों के पास 25 लाख रुपए नगदी भी थी, लेकिन कुनिहार के समीप पहुंचकर इनको पता चला कि राइस पुलर बताए गए लोगों के पास है ही नहीं। राइस पुलर लेकर आने वाली पार्टी ने इन लोगों से पैसे लूट लिए और फरार हो गए। इन लुटेरों को बाद में पुलिस ने पकड़ लिया। हिमाचल प्रदेश में राइस पुलर से जुड़ा यह पहला मामला है। चर्चा यह भी है कि कुनिहार व आसपास के क्षेत्र में किसी व्यक्ति के पास राइस पुलर हो सकता है, इसलिए इस राइस पुलर की खोज में लुटरे पंजाब व हरियाणा से यहां पर आए थे, लेकिन पूर्व सूचना मिलने की वजह से जिस व्यक्ति को राइस पुलर लेकर आना था, वह नहीं पहुंचा। अर्की थाना के तहत लूट के मामले में गिरफ्तार तीन आरोपी तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिए गए हैं। पुलिस ने मंगलवार को आरोपियों को अदालत में पेश किया। यहां से इन्हें नौ जनवरी तक के पुलिस रिमांड में भेज दिया गया है। इसके अलावा पुलिस ने लूट की वारदात में इस्तेमाल एक स्कार्पियो गाड़ी को भी हरियाणा से बरामद किया है। पुलिस इस मामले में इनके कुछ अन्य साथियों की तलाश कर रही है, जिसके बाद कई खुलासे हो सकते है। डीएसपी अर्की नरवीर राठौर ने बताया कि राइस पुलर होने की सूचना के बाद पंजाब व हरियाणा से कुछ लोग यहां पर आए थे, लेकिन बाद में जब राइस पुलर नहीं मिला तोे लुटेरे खरीददारों से पैसे  लेकर फरार हो गए।

क्या है राइस पुलर

राइस पुलर धातु का सबसे पहले प्रयोग ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक सिक्के में किया था। राइस पुलर में पांच तत्त्वों सहित तांबा और प्लेटिनम होता है। इस धातु की खास बात यह है कि यह  चावल के दाने को अपनी तरफ खींचती है, इसलिए इसे राइस पुलर कहा जाता है। प्राचीन समय में इसका प्रयोग डोम के गुंबद पर आसमानी बिजली से बचने के  लिए किया जाता था। कई वर्षों तक  आसमानी बिजली  गिरने की वजह से यह धातु चामत्कारिक  रूप ले लेती है।

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