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सिर्फ 40 फीसदी लोगों को मिले भोजन की गारंटी

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नई दिल्ली, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून देश की 67 की जगह 40 फीसदी आबादी को ही कवर करे। सबसिडी वाला अनाज पांच किलो के बजाय सात किलो प्रति व्यक्ति प्रति माह मुहैया कराया जाए। किसानों को 7000 रुपए प्रति हेक्टेयर के आधार पर इनपुट सबसिडी दी जाए। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत सभी राशनवाले उपभोक्ताओं को अनाज की आपूर्ति के बजाय उनके खातों में नकद राशि जमा कराने का प्रावधान किया जाए। इससे कमोबेश 30000 करोड़ सालाना की सबसिडी की बचत हो सकती है। ये सिफारिशें उस उच्च स्तरीय कमेटी की हैं, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व केंद्रीय खाद्य मंत्री शांता कुमार की अध्यक्षता में गठित किया था। बुधवार को हिमाचल से सांसद शांता कुमार ने मौजूदा खाद्य मंत्री रामविलास पासवान, भारतीय खाद्य निगम के अध्यक्ष सी. विश्वनाथ, खाद्य सचिव सुधीर कुमार और कमेटी के सदस्य अशोक गुलाटी आदि की मौजूदगी में रपट प्रधानमंत्री मोदी को सौंपी। प्रधानमंत्री ने रपट को खाद्य मंत्रालय के विचारार्थ भेज दिया है, ताकि इसे समयबद्ध तरीके से लागू किया जा सके। शांता कमेटी ने खासतौर से तीन-चार सिफारिशें की हैं और एफसीआई की भूमिका को बदलने का सुझाव दिया है। सबसे महत्त्वपूर्ण सिफारिश राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के संदर्भ में यह की गई है कि देश की 40 फीसदी आबादी ही इसके दायरे में रहे। फिलहाल यूपीए सरकार के दौरान से करीब 67 फीसदी आबादी इस कानून के तहत कवर हो रही है। शेष 27 फीसदी आबादी को क्यों हटाया गया है, इसका कोई स्पष्टीकरण नहीं मिला। अलबत्ता शांता के करीबी सूत्रों ने बताया कि इसके लिए प्रारूप बाद में तय कर लिया जाएगा। फिलहाल कानून के तहत भारत की करीब 75 फीसदी ग्रामीण और 50 फीसदी शहरी आबादी को पांच किलोग्राम खाद्यान्न प्रति व्यक्ति प्रति माह देने का प्रावधान है। लिहाजा साफ है कि कमेटी की सिफारिशों को लागू करने के मद्देनजर कानून में संशोधन करना पड़ेगा। नई सिफारिशों के दायरे में कौन से और कितने ‘पात्र परिवार’ आएंगे, इसका फैसला राज्य सरकारों पर छोड़ दिया गया है।

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