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सिरमौर में 220 पंचायतें भाग्य रेखा से जुड़ी

सडक़ों के विस्तार से किसानों की आर्थिकी हुई सुदृढ़
नाहन, 24 सितंबर :
 सडक़ें पहाड़ी क्षेत्र की भाग्य रेखाएं कहलाती है तथा सडक़ों के अभाव में पहाड़ी क्षेत्र के विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। स्वर्गीय डा0 वाईएस परमार द्वारा कहे जाने वाले इस वाक्य को वर्तमान सरकार द्वारा प्रदेश में सडक़ों का जाल बिछाकर चरितार्थ किया गया है।
 प्रदेश में जहां सडक़ों के माध्यम से अनेकों क्षेत्र जुड़ चुके है वही पर जिला सिरमौर में भी भाग्य रेखा का विस्तार में हर वर्ष बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है जिसका जीवंत प्रमाण सिरमौर जिला की कुल 228 पंचायतों में से अब तक 220 पंचाय

तें एवं 724 गांव सडक़ सुविधा से जुडऩे में मिलता है  जिससे जिला में लोगो की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में  आशातीत प्रगति दर्ज की गई है जबकि शेष 8 पंचायतों को जोडऩे का कार्य प्रगति पर है जिसमें चार पंचायतें रेणुका विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र, दो पंचायतें शिलाई और एक-एक पंचायत नाहन व पांवटा साहिब में हैं जबकि पच्छाद में सभी 60 पंचायतें सडक़ सुविधा से जुड़ गई हैं।
लोक निर्माण विभाग के प्रवक्ता के अनुसार जिला में सडक़ो की कुल लंबाई तीन हजार किलोमीटर है जिनमें से 1300 किलोमीटर सडक़ें पक्की है इसके अतिरिक्त जिला में दो राष्ट्रीय उच्च मार्ग गुजरते है जिसमें अंबाला-पांवटा साहिब उच्च मार्ग की लंबाई 64 किलोमीटर है जबकि लाल ढांग- रोहडू राष्ट्रीय उच्च मार्ग की लंबाई 120 किलोमीटर है। उन्होंने बताया कि सिरमौर जिला में सडक़ो एवं पुलों के निर्माण पर चालू वित्त वर्ष के दौरान राज्य योजना, नाबार्ड, प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना, विश्व बैंक इत्यादि की सहायता से 100 करोड़ की राशि व्यय करने का प्रावधान किया गया है इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय उच्च मार्गो के सुधार एवं निर्माण के लिए 21 करोड़ की राशि भारत सरकार द्वारा स्वीकृत की गई है। उन्होंने बताया कि आगामी दो वर्षों में जिला की सभी 971 गांवों को सडक़ सुविधा से जोडऩे का लक्ष्य रखा गया है जिसके लिए सरकार द्वारा महत्वकांक्षी परियोजना तैयार की गई है इसके अतिरिक्त सडक़ो को पक्का एवं चौड़ा करने के लिए भी कार्य योजना तैयार की गई है।
रेणुका निर्वाचन क्षेत्र के लिए सरकार ने 40 करोड़ की आठ सडक़ योजनाएं स्वीकृत की गई है जिसमें 6 करोड़ की भझोंड-धटलोग सडक़, 7 करोड की थैनबाग-गेहल सडक़, साढ़े चार करोड़ की ख्खडाह-दिवडी सडक़, पांच करोड़ की दनोई-द्राबिल सडक़, तीन-तीन करोड़ की सैंज एवं चोकर संपर्क सडक़ तथा चार करोड़ की द्राबिल-कोटी सडक़ शामिल है। उन्होंने बताया कि जिला में नाबार्ड के तहत 146 परियोजनाएं स्वीकृत की गई है जिनमें से  26 का कार्य पूर्ण हो चुका है जबकि प्रधानमंत्री सडक़ योजना के तहत 158 परियोजनाओं में से 113 का कार्य पूर्ण हो चुका है तथा शेष कार्य प्रगति पर है और चालू वित्त वर्ष में इस योजना के तहत  52 किलोमीटर लंबी सडक़ ों का निर्माण किया जाएगा।
सडक़ो के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को आवागमन की सुविधा मिलने के साथ-साथ किसानों को अपनी नगदी फसलों को मण्डिय़ों तक पहुंचाने में आसानी हुई है जिससे किसानों की आर्थिकी काफी सुदृढ़ हुई है और यह एक जीवन्त उदाहरण है कि जो क्षेत्रों में सडक़ सुविधा से जुड़े हैं उन गांवों की काया पलट हुई है। और अब अधिकांश गांव में भी शहरों जैसी हर सुविधा उपलब्ध हो गई है। यही नहीं सडक़ सुविधा होने पर कर्मचारी भी ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देने के लिए स्वैच्छा से जाते है जोकि एक बहुत बड़ी उपलब्धि है और आशा की जाती है कि निकट भविष्य में सिरमौर के प्रत्येक गांव में सडक़ सुविधा मिलने से जिला में विकास का एक नया अध्याय जुड़
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