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सरांहा में वामन द्वादशी मेला 16 व 17 सितंबर को

वामन भगवान के दर्शन को उमड़ता है जन सैलाब

हिमाचल प्रदेश में मनाए जाने वाले पारंपरिक मेलों की श्रृंखला में सिरमौर जिला के सरांहा में कालांतर से मनाए जाने वाला वामन द्वादशी मेला इस वर्ष 16 सितंबर अश्वनी मास की सक्रांति को बडे़ हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह मेला सरांहा बाजार स्थित भगवान वामन के प्राचीन मंदिर के नाम पर हर वर्ष भाद्रमास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को आयोजित किया जाता है जिसमें जिला सिरमौर के अतिरिक्त पड़ोसी राज्य हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ से हजारों की तादाद में श्रद्घालु मेले मे पहुंचकर भगवान वामन का आशर््िावाद प्राप्त करते हैं।
मेले में निकाली जाने वाली भगवान वामन की शोभा-यात्रा लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होती है । लोग वामन भगवान की पालकी के दर्शन का एक वर्ष से बेसब्री से इंतजार करते हैं। मान्यता के अनुसार भगवान वामन के दर्शन एवं नौका विहार के दौरान प्रसाद प्राप्त करने से क्रूर ग्रह के प्रकोप से शान्ति मिलती है। मेले का शुभारंभ वामन भगवान की पारंपरिक पूजा एवं शोभा-यात्रा के साथ होगा जिसमें सैंकड़ों की तादाद में लोग भाग लेंगे। इसके उपरान्त सरांहा बाजार में स्थित प्राचीन तालाब में वामन भगवान को नौकाविहार करवाया जाता है तथा विगत कईं वर्षों से ऐसा पाया गया है और लोगों का विश्वास भी है कि नौका विहार के समय भगवान इन्द्र प्रसन्न होकर वर्षा की हल्की फुहारे डालते है उस समय यह दृष्य अत्यंत मनोहारी होता है और लोग प्रसाद प्राप्त करने के लिए आतुर होते हैं।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार वामन भगवान को विष्णु का पांचवा अवतार माना जाता है । कथा के अनुसार दैत्य सेनापति राजा बलि द्वारा देवताओं को पराजित करके स्वर्ग का राज्य प्राप्त कर लिया और उसने इसी खुशी में अश्व मेघ यज्ञ का आयोजन किया। देवता अपनी पराजय से दु:खी होकर भगवान विष्णु की शरण में गए। भगवान विष्णु उनकी सहायता करने का आश्वासन देते हैं और भगवान विष्णु वामन रुप में माता अदिति के गर्भ से उत्पन्न होने का वचन देते हैं। दैत्यराज बलि द्वारा देवों के पराभव के बाद कश्यप जी के कहने से माता अदिति पयोव्रत का अनुष्ठान करती हैं जो पुत्र प्राप्ति के लिए किया जाता है तब भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी के दिन अदिति के गर्भ से विष्णु भगवान वामन के रूप में अवतार लिया ।
वामन अवतार ले, ब्राह्माण वेष धर कर, राजा बलि के यहां भिक्षा मांगने पहुंते हैं। वामन रुप में श्री विष्णु भिक्षा में तीन पग भूमि मांगते हैं, राजा बलि अपने वचन पर अडिग रहते हुए, श्री विष्णु को तीन पग भूमि दान में दे देते हैं। वामन रुप में भगवान ने एक पग में स्वर्ग आेर दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लिया और अभी तीसरा पैर रखना शेष था। एेसे मे राजा बलि अपना वचन निभाते हुए अपना सिर भगवान के आगे रख देते हैं और वामन भगवान के पैर रखते ही, राजा बलि परलोक पहुंच जाते हैं। बलि के द्वारा वचन का पालन करने पर, भगवान विष्णु अत्यन्त प्रसन्न होते हैं और बलि को पाताललोक का स्वामी बना देते हैं इस तरह भगवान वामन देवताआें की सहायता कर उन्हें पुन: स्वर्ग का अधिकारी बनाते हैं।

इस वर्ष सरांहा में वामन द्वादशी का मेला 16 एवं 17 सितंबर को पारंपरिक एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मेले के प्रथम दिन उपायुक्त सिरमौर श्री विकास लाबरू शोभा यात्रा की अगुवाई करेंगे जबकि 17 सितंबर को मेले के समापन समारोह पर मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह बतौर मुख्यतिथि शिरकत करेंगे। मेला समिति द्वारा इस पारंपरिक मेले को आकर्षक बनाने के लिए मेले की दोनो संध्याओं में सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए कलाकारों को आमंत्रित किया गया है इसके अतिरिक्त मेले के दूसरे दिन विशाल दंगल का भी आयोजन किया जाएगा जिसमें उत्तरी भारत के नामी पहलवान भाग लेंगे। मेले में आने वाले लोगों की सुविधा के लिए मेला समिति द्वारा सुरक्षा सहित सभी प्रबन्ध पूरे कर लिए गए हैं।

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