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सरकाघाट में स्वच्छता के दावे खोखले

सरकाघाट, उपमंडल सरकाघाट मुख्यालय पर वर्ष 1981 में नगर पंचायत की स्थापना की गई थी, लेकिन नगर के विकास के मामले में सफल नहीं हो पाई, जबकि नगर विकास के लिए समय-समय पर धन का प्रावधान होता रहा है। चयनित प्रतिनिधि व विभागीय ढुलमुल रवैये के कारण विकास को तीव्र गति नहीं मिल पाई है। सड़कों व रास्तों की हालत बड़ी दयनीय है। लगभग पिछले दो दशकों से सीवरेज योजना लटकती आ रही है। नगर पंचायत सरकाघाट के तहत यह योजना पांच करोड़ 61 लाख तथा 51 हजार के प्रारंभिक बजट के प्रावधान के अंतर्गत शुरू की गई थी तथा लगभग दो दशकों के बाद भी यह योजना मुकम्मल नहीं हो पाई। इस योजना के निर्माण के लिए सरकार द्वारा लगभग 20 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस योजना के पूरा न होने पर सरकाघाट मुख्य बाजार रोपा कालोनी व अन्य जगहों पर लोगों ने सेफ्टी टैंकों ओवरफ्लो बहाव खुली नालियों में छोड़ा है। नगर पंचायत के अनेक वार्डों के रास्तों की हालत बड़ी दयनीय है। कई सेफ्टी टैंक ओवरफलो हैं, जिनकी गंदगी नालियों में बह रही है तथा लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक सुलभ शौचालय का निमार्ण सरकाघाट में अभी तक नहीं हो सका है। लाखों की लागत से स्थापित की गई पांच हाई मास्ट लाइटें सरकाघाट नगर पंचायत में शोपीस बनकर रह गई हैं। नगर पंचायत विकास समिति के अध्यक्ष सोहन लाल गुप्ता, बलबीर सिंह, राम प्रकाश, बृज लाल, संतोष कुमार, ओम प्रकाश, समाज सेवी केएल राणा, चंद्रमणि शर्मा, विपिन कौशल, राजेश कौंडल, अश्वनी गुलेरिया, बीआर सुमन, तारा चंद कौशल, लेखराज शर्मा, प्रताप चौहान व अन्य लोगों ने नगर पंचायत विकास कार्यों को तवज्जो व तीव्रता प्रदान करने की मांग की गई है। इस बारे में जन स्वास्थ्य एवं सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता पीके वैद्य ने बताया कि सीवरेज सिस्टम ए-जोन टटीह का कार्य पूरा हो चुका है। सी-जोन बरच्छवाड का कार्य 2016 तक पूरा कर लिया जाएगा। उधर, नगर पंचायत के सचिव ओपी शर्मा ने कहा कि शहर में साफ-सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए बेहतरीन प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए नगर पंचायत कार्य में जुटी हुई है।

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