October 18, 2017

सफलता के लिए पढ़ाई ही नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति एवं आत्म विश्वास की जरूरत होती है।

पालमपुर

पालमपुर:- सफलता के लिए पढ़ाई ही नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति एवं आत्म विश्वास की जरूरत होती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है, पालमपुर उपमण्डल के अंतर्गत छोटे से गांव ढ़ाटी की महिलाओं ने। ग्रामीण परिवेश में केवल चुल्हे चैके एवं घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली यह महिलाएं, आज हर किसी के लिए प्रेरणा कर स्त्रोत बनी हैं।

प्रदेश सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण की दिशा में महिलाओं को आत्म निर्भर एवं स्वरोजगार की ओर प्रेरित करने के लिए विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। इसी कड़ी में ढ़ाटी गांव की 16 महिलाओं ने समृद्धि स्वयं सहायता समूह का गठन किया गया था। इन महिलाओं ने गांव में उपलब्ध संसाधनों तथा जंगलों में उपलब्ध आम, आंवला, भेड़ा, हरड़, वांस ढियंू, लंुगडू इत्यादि जो हर वर्ष बिना उपयोग के बेकार हो जाते थे। उनका प्रयोग कर गांव मे ही आचार व चटनी का उत्पादन शुरू किया। पहले वर्ष मात्र पांच किलो से आरंभ कर आज इसे 60 टन प्रतिवर्ष पहुंचा दिया गया है।

दिन रात की कड़ी मेहनत से 16 महिलाओं से प्रारंभ समृद्धि स्वयं सहायता समूह आज पूरे भारत वर्ष में अपनी बेहतरीन आचार व चटनी तथा अन्य उत्पादों के लिए किसी परिचय का मोहताज नहीं है। स्वयं सहायता समूह से समृद्धि महिला को-ओपरटिव सोसायटी बनी, इस संस्था की आज लगभग 300 महिला सदस्य हैं। जबकि जिला कांगड़ा तथा चंबा के 26 महिला स्वयं सहायता समूह भी इनके साथ जुडे़ हैं।

महिलाओं द्वारा महिलाओं की देखरेख में चल रही इस सोसायटी के प्रबंधन में आठवीं कक्षा से अधिक किसी भी महिला की पढ़ाई-लिखाई नहीं है। बावजूद इसके सोसायटी की महिलाएं ही उत्पादांे को तैयार करने, पैकिंग, मार्केंिटंग से लेकर गुणवता जांच का कार्य देख रही हैं। कड़ी मेहनत, आत्मविश्वास एवं कर्तव्य निष्ठा के चलते सोसायटी की वार्षिक आय लभभग 30 लाख रूपये वार्षिक है। जबकि सोसायटी की महिलाएं प्रतिमाह औसतन 6 से 12 हजार रूपये तक घर बैठे कमा कर स्वाभलंबी एवं आत्मनिर्भर बनी हैं।
सोसायटी की महिलाएं अपने घरो के आस-पास में उपलब्ध संसाधनों तथा जंगलों में तैयार औषधीय फलों जैसे आंवला, जामून, भेड़ा तथा हरड़ तथा बंजर जमीन में तैयार आम, वांस, ढिंयू, लुंगडू, निंबू तथा जिमिकंद इत्यादि जो बिना उपयोग के प्रतिवर्ष नष्ट हो जाते थे। इन्हें प्रयोग कर आचार, चटनी तथा त्रिपला इत्यादि लगभग 40 किस्म के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इनके उत्पादों की मांग केवल प्रदेश में ही नहीं बल्कि दिल्ली व मुम्बई जैसे बड़े शहरों में भी इजाफा हो रहा है। प्रदेश के जंगलों में उपलब्ध औषधीय गुणों तथा बिना रसायनों तथा कीटनाशकों के प्रभाव न होने के चलते समृद्धि के समृद्धि के उत्पादों की काफी मांग बाजार में है। इसके अतिरिक्त यहां सीरा, बड्यिां तथा पापड़ इत्यादि भी तैयार किए जा रहे हैं।

प्रतिस्पर्धा के इस दौर ने सोसायटी की महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। सोसायटी ने अपने उत्पादों की गुणवत्ता के लिए एफपीओ पंजिकरण करवाया है, जबकि दिल्ली की फर्म समृद्धि के उत्पादों की पूरे देश में मार्केटिंग कर रही है। गांव को छोड़कर पालमपुर के निकट ठाकुरद्वारा में किराए का भवन लेकर यहां उत्पादन शुरू किया है। सोसायटी द्वारा ठाकुरद्वारा में ही अपनी जमीन खरीदी गई है जहां से आने वाले समय में उत्पाद तैयार किए जायेंगे।

समृद्धि महिला को-ओपरटिव सोसायटी की अध्यक्ष श्रीमती वीना देवी ने बताया कि समृद्धि संस्था को सरकार की ओर से दस वर्षो तक सभी प्रकार के टेक्स इत्यादि से छूट प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने समृद्धि के उत्पादों को बाजार उपलब्ध करवाने के लिए एचपीएमसी के मण्डी जिला के जड़ौल तथा सोलन जिला के जाबली (परवाणू) में विक्रय केंद्र की सुविधा उपलब्ध करवाई है। इसके अतिरिक्त राजकीय एवं राष्ट्रीय पर्वों के अवसर पर आयोजित मेलों, उत्सवों तथा त्योहारों के अवसर पर विक्रय केंद्र की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाती है। उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा समय समय पर प्रदेश के विभिन्न भागों से स्वयं सहायता समूहों को यहां लाकर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इसके लिए उन्हें सरकार द्वारा फीस दी जा रही है। साथ ही समृद्धि समूह की कार्यप्रणाली से अवगत होने का मौका मिलता है, जिससे इन्हें भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

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