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सचिन के भारत रतन की आलोचना न कर –भारतीय होने का गर्व महसूस करें

सचिन के भारत रतन की आलोचना  न कर –भर्ती होने गा गर्व महसूस करें

15 नवम्बर 1989 का दिन भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्श्वों में अंकित है जब खेल जगत में एक ऐसे राजदूत ने कदम रखा जिसने आज अपनी कला के प्रदर्शन से भारत का नाम पूरे विश्व में लगातार ऊँचा किया I सचिन तेंदुलकर नामक इस हीरे ने 2013 के नबम्बर में जब 24 वर्ष बाद उसने खेल मैदान से विदा ली तो भारत सरकार ने उसे देश के सबसे बड़े सम्मान भारत रतन से आलंकृत किया I इसमें दो राय नहीं की देश द्वारा अब तक भारत रतन ग्रहण कर चुके सभी सर्वपल्ली राधाकृष्णन (1954) से लेकर भीमसेन जोशी (2008 ) तक के महानुभावों ने भी देश का नाम ही उंचा किया था I फिर देश के इस पहले खिलाड़ी को भारत रतन मिलने पर कुछ ऐसे लोगों द्वारा नाक भों क्यों सिकोड़ी जा रही है जो स्वयं को देश भक्त की श्रेणी में अब्बल मानतें है I

हाकी के जादूगर दयां चंद और पूर्व परधानमंत्री अत्तल बिहारी बाचपाई को भी यही सम्मान मिलना ही चाहिए ,इस बात से कोइ इनकार नहीं कर रहा है I परन्तु तेंदुलकर को पहले सम्मानित किया जाना ,भी तो गलत न है I तेंदुलकर के 200 टेस्ट में 15921 रन ,51शतक /68अर्ध शतक और 463 एकदिवसीय मैचों में 18426रन 49 शतक/96 अर्धशतकों की बराबरी कों कर सकता है I हम सब को सरकार का धन्यवादी होना चाहिए की सचिन को यह सम्मान सही समय पर दिया गया I अन्यथा लोह्पुरुष सरदार पटेल को तो यह सम्मान उनकी मृत्यु से 41वर्ष बाद दिया गया ,क्या सरकार तब तक उनके कार्यों को जांच ही रही थी ? इसी तरह बाबा साहिब आंबेडकर और  अब्दुल कलाम आजाद को को देहांत के 34 वर्ष बाद, जय परकाश नारायण को  देहांत के 20 वर्ष बाद  दिया गया Iसम्मानित करने में ये देरी नहीं होनी चाहिए, परन्तु जब किसी को सम्मान मिले तो उसकी आलूचना भी न हो तो हम खुद को सही भारतीय कह पायेंगे i जय हिन्द

अरविन्द शर्मा

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1 Comment

  1. dharmendra

    सचिन ने जब क्रिकेट कि सुरुआत कि थी जब उनके पास कितना बैंक बैलेंस था. जब आज वो क्रिकेट को २४ साल बाद बिदा कर जा रहे है तब बैंक बैलेंस प्रॉपर्टी सम्पति का हिसाब लगाया जाय तो आप देखेंगे कि उन्होंने क्रिकेट को बिज़नस समज कर कितना धन इकठा किया . जितना धन सचिन ने इकठा किया उतना आज तक भारत देश के किसी भी खेल के खिलाडी ने इकठा नहीं किया होगा. भारत देश का मान तो सतरंज में आनंद ने टेनिश में सानया ने एसियाड में उषा ने ओलम्पिक में सिंह ने भी विदेशो में बढ़ाया . क्या सभी बारात के रतन नहीं बन सकते है. वो टीम भी इसकी हक़दार है जिसने मंगल पर भारतीय यान भेजा है. केवल वो क्रिकेट खेल जिस पर देस विदेशो में करोडो रुपयो का सट्टा लगता है कई लोग तो केवल सट्टे के लिए क्रिकेट देखते है.व् बर्बाद हो जाते है ऐसे खेल के टिकिट ही गरीब खरीद नहीं पाता ये गरीब भारत देश के लोगो का नहीं अमीरो का खेल बन चूका है. सरकार को अन्य भारतीय खेलो पर धन खर्च करना चाहिए . जिससे दूसरे खेलो के खिलाड़ी भी अंतरास्ट्रीय ईस्टर पर अपनी उपस्तिथि दर्ज करवा सके. खेल को धन कि लिलासा से खेलने वाले या खेल से धन कमाने वाले को भारत रत्न नहीं देना चाहिए.

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