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शिवरात्रि महोत्सव में टूटेगी 500 साल पुरानी परम्परा!

default (28)मंडी: अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में इस बार देवताओं के साथ आने वाले देवलुओं को मेला कमेटी राशन नहीं देगी। इसके बदले कारकूनों को प्रतिदिन भोजन बनाने के लिए नकद राशि दी जाएगी और अपने स्तर पर देवलू राशन खरीद सकेंगे। यह निर्णय मेली कमेटी ने सर्व देवता कमेटी के कारकूनों के साथ बैठक में लिया है लेकिन इस पर अभी अंतिम मोहर नहीं लग सकी है। ऐसा माना जा रहा है कि देवलुओं को उत्सव के दौरान राशन लेने के लिए हर वर्ष कतार में लगे रहना पड़ता है। उनकी परेशानियों को देखते हुए मेला कमेटी यह निर्णय लेने जा रही है। अगर ऐसा संभव हुआ तो अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में प्रशासन द्वारा करीब 500 साल पुरानी परंपरा बदल दी जाएगी। हालांकि यह अभी पूरी तरह तय नहीं है लेकिन प्रशासन के साथ देवता के कारकूनों की होने वाली बैठक में इस पर अंतिम निर्णय 23 जनवरी को होने वाली देवता उपसमिति की बैठक में लिया जाएगा। मंडी शहर में मनाए जाने वाले शिवरात्रि मेले में देवी-देवताओं को राशन देने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। पंजीकृत देवी-देवता के साथ-साथ अब बिना पंजीकरण वाले देवी-देवताओं को भी राशन मुहैया करवाया जा रहा है। सर्व देवता कमेटी के प्रधान पंडित शिव पाल शर्मा का कहना है कि प्रशासन का यह निर्णय सराहनीय है लेकिन इस संदर्भ में देव समाज से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में प्रशासन हर बार की तरह नकदी देने के अलावा भोजन पकाने व आग सेंकने के लिए लकडिय़ां देगा। सर्व देवता कमेटी के कारकूनों ने मांग की है कि यह कार्य प्रशासन के सहयोग बिना असंभव है क्योंकि भोजन बनाने के लिए भारी मात्रा में बालन (लकड़ी) की जरूरत होती है। गौर हो कि उत्सव में दिन का भोजन व्यापार मंडल व अन्य सहयोगी संस्थाएं देवलुओं क ो लंगर में करवाती हैं लेकिन मुख्य कारकूनों को अलग से खाना बनता है।

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