October 21, 2017

शिक्षकों के लिए मुसीबत बनी ये शर्त

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शिमला, शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत शिक्षकों को एक साल में कम से कम 220 दिन पढ़ाना अनिवार्य है। पर हैरत की बात है कि कोई भी शिक्षक अपने टीचिंग डे पूरे नहीं कर पा रहा। साल भर में 365 दिन होते हैं, इनमें 52 दिन स्कूल की छुट्टियों में, 50 संडे, 25 जीएच, 12 कैजुअल, 20 दिन यूनियन के लीडरों व सदस्यों के लिए, 20 अर्न लीव, 15 दिन ट्रेनिंग, आरएल, एलएच सहित जोड़कर 208 दिन छुट्टियों में ही बीत जाते हैं। इस पर यदि चुनाव ड्यूटी के 30 दिन जोड़ दिए जाएं तो मात्र 178 दिन ही शिक्षकों को पढ़ाने के लिए बचते हैं। ऐसे में 178 दिन में 220 दिन पूरे करना किसी भी शिक्षक के लिए संभव नहीं है। टीचर यूनियनों के लीडर के लिए दी जाने वाले 20 दिन के अवकाश को निकाल भी दिया जाए तो 198 दिन बनते हैं, तब भी टीचिंग डे के 220 दिन पूरे नहीं होते हैं। अब इन 198 दिन में शिक्षकों को जनगणना, मिड डे मील, टेबल मार्किंग, सेमीनार, एग्जाम ड्यूटियों के अलावा कई और गैर शैक्षणिक कार्य शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश हैं कि शिक्षकों से कम से कम गैर शैक्षणिक कार्य करवाएं जाएं जबकि हकीकत कुछ और ही है। हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ के प्रवक्ता डॉ. मामराज पुंडीर ने कहा कि शिक्षक टीचिंग डे पूरे नहीं कर पा रहे हैं। शिक्षकों को जब पढ़ाने का मौका ही नहीं मिलेगा तो डे कैसे पूरे होंगे। मिड डे मील, सेमीनार, इलेक्शन, मतगणना, दवाइयां बांटने के काम के अलावा दर्जनों काम दिए गए हैं। ऐसे में टीचिंग डे कैसे पूरे हो सकते हैं। सरकार को पॉलिसी में बदलाव करने पर गंभीरता से सोचना होगा। इससे डे भी बढ़ेंगे और स्कूल का रिजल्ट भी बेहतर होगा।

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