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विश्व विख्यात शक्तिपीठ मेंं असुविधाओं का आलम क्यों?

हिमाचल परिदृश्य…..
विश्व विख्यात शक्तिपीठ मेंं असुविधाओं का आलम क्यों?

कपिल शर्मा ,ज्वालामुखी

शक्तिपीठ ज्वालामुखी दुनिया के करोड़ों-अरबों लोगों की आस्था का केंद्र है, पर इस विश्व विख्यात शक्तिपीठ में नवरात्रों के दौरान शौचालय और पेयजल की पेश आने वाली समस्या यहां आने वाले मां के भक्तों पर नकारात्मक प्रभाव छोड़ती है….
विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ ज्वालामुखी विश्व मानचित्र पर सुनहरी अक्षरों में अंकित है, इस सच्चाई को नकारा नहीं जा सकता। नवरात्रों के अलावा भी यहां पर पूरा साल भर देशी-विदेशी पर्यटकों का हुजूम लगा रहता है। यहां पर दुनिया के कोने-कोने से आने वाले मां के भक्तों का इस विश्व प्रसिद्ध मां ज्वालामुखी के मंदिर में यहां पर आकर जो बात अखरती है वह है यहां पर सुविधाओं का टोटा। यहां पर विशेषकर शौचालयों की उचित और सही व्यवस्था न होना अकसर सैलानियों को खूब चिढ़ाती है। एक जानकारी के अनुसार यहां पर इस वक्त जो शौचालय बने हुए हैं वे कम से कम १५-२० साल पुराने हैं जो न सिर्फ   नाकाफी है, बल्कि उनकी हालत भी दयनीय है। मंदिर न्यास द्वारा संचालित स्नानागार व शौचालय में
जो शुल्क निर्धारित किया गया है वह भी यहां आने वाले श्रद्धालुओं को असुविधा देता है । मंदिर न्यास का उदेशय श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए धन को उन श्रद्धालुओं की सुविधा पर ही खर्च किया जाना है लेकिन इन मूलभूत सुविधाओं से भी शुल्क वसूला जा रहा है जो की न्यायसंगत नही है। अगर इस स्नानागार व शौचालय में वसूले जा रहे
शुल्क को निशुल्क कर श्रद्धालुओं को सुविधा दी जाए तो यह तो श्रद्धालुओं को मंदिर न्यास की ओर से यह सुविधा किसी उपहार से कम ना होगी।
वहीं दूसरी ओर यहां पर जो नवरात्रों के दौरान सबसे बड़ी समस्या आती है वह है पीने के पानी की। यहां पर पिछले कई सालों से पीने के पानी के लिए कोई नर्ई योजना नहीं बनाई गई है जिससे यहां पर मेलों के दौरान पर्यटकों को काफी समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है, जिसका स्थायी हल निकालना बेहद जरूरी है। यहां पर नवरात्रों के दौरान लाखों की चढ़त नकदी ,सोना और चांदी के रूप में मां के  भक्तों द्वारा मां के चरणों में अर्पित की जाती है इसके बावजूद यहां पर मूलभूत सुविधाओं का न होना काफी सवाल चस्पां करता है। मंदिर न्यास को
इस ओर गंभीर होने की आवश्यकता है ताकि सैकड़ों की तादाद में यहां पर आने वाले मां के भक्तों पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। इसके साथ -साथ यहां पर भिखारियों की तादाद भी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, जिस पर अंकुश लगाना बेहद जरूरी है। पर्यटकों के जेबें काटने के कई मामले यहां पर प्रकाश में आते रहते हैं। यहां पर प्रवासियों की संख्या में भी लगातार इजाफा होता जा रहा है जो कभी भी किसी बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं इस अंदेशे से इनकार नहीं किया जा सकता है। स्थानीय पुलिस के साथ -साथ यहां पर आम जन को भी सतर्क होना होगा। इस आस्था के केंद्र ज्वालामुखी में एक ओर जो कमी अखरती है वह है अग्निशमन केंद्र का न होना। अगर दुर्भाग्य से यहां पर कभी आगजनी की घटना घट जाए तो फायर ब्रिगेड की गाड़ी हमीरपुर या फिर कांगड़ा से मंगवानी पड़ती है ,जिसके पहुंचते-पहुंचते सब कुछ स्वाह हो जाता है। इस मांग को कई बार स्थानीय लोगों ने सरकार के समक्ष उठाया है पर मात्र आश्वासनों तक ही काम सीमित रहा है। अगर देखा जाए तो यहां पर हर लिहाज से अग्निशमन केंद्र का होना बेहद लाजिमी है, पर इस बात से सरकार क्योंंं अनजान है यह समझ से परे है। अगर प्रदेश सरकार की नजर-ए-इनायत इस विश्व प्रसिद्ध  स्थल पर हो जाए तो यहां आने वाले श्रद्धालु
बेहतर सुविधाओं से वंचित ना रह पाऐंगें ।
स्थानीय प्रशासन और मंदिर न्यास
को चाहिए कि यहां पर विशेषकर शौचालयों और पेयजल का नया प्रारूप तैयार कर उस पर कार्य शुरू करवाया जाए ताकि दुनिया के कोने-कोने से यहां पर आने वाले मां के भक्तों को यहां पर इन समस्याओं से दो-चार न होना पड़े ।
कपिल शर्मा ,ज्वालामुखी

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