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लोकसभा चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस और भाजपा नये-2 नारे गढऩे में लगे हैं

मंडी, 21 सितम्बर (पुंछी):लोकसभा चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस और भाजपा नये-2 नारे गढऩे में लगे हैं परन्तु नारों में मुद्दे वहीं पुराने हैं जिन्हें हर बार चुनावों के समय अलग ढंग से पेश किया जाता हैं। कांग्रेस पार्टी अपने आपको गरीबों का हमदर्द कह रही हैं और मनरेगा और भोजन के अधिकार कानून को अपनी उपलब्धि बता रही हैं। माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पाटी उनसे यह पूछना चाहती है कि इस देश में 66 वर्षो में से 60 वर्ष कांग्रेस ने ही राज किया तो फिर आज भी हमारे देश में दुनियां के सबसे ज्यादा गरीब क्यों हैं? सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चे और महिलाएं हमारे देश में क्यों है? युवा पीढ़ी में से आधे बेरोजगार क्यों है? क्या इसके लिए कांग्रेस पार्टी की गरीब विरोधी और अमीर परस्त नीतियां जिम्मेवार नहीं हैं? और जब तक यह नीतियां जारी रहेगी तब तक हमारे देश में गरीबों की संख्या बढ़ती रहेगी और दूसरी तरफ कुछ मुठठी भर पूंजीपतियों व कंपनियों की आय औेर संपति अरबों-खराबों में पहुंच रही हैं। तो ऐसी स्थिति में कांग्रेस पार्टी के भावी प्रधानमंत्री राहुल गांधी कौन सी ऐसा नई नीतियां लागू करना चाहते हैं। जिससे उनकी पार्टी के राज में जारी समस्यायें व गरीबी कम होगी। दूसरी तरफ भाजपा ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री का उम्मीदवार घोषित कर दिया हैं और एक नया नारा भी दिया हैं। माकपा के जिला सचिव भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि ’’नई सोच-नई उम्मीद‘‘ देश की जनता भलि भांति जानती है कि भाजपा और कांग्रेस की आर्थिक नीतियां एक जैसी है जो नीजिकरण और उदारीकरण को बढवा देती हैं। दूसरी तरफ भाजपा अभी भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पुरानी विचारधारा के तहत ही इस देश को हिन्दू राष्ट्र घोषित करना चाहती हैं और नरेन्द्र मोदी इस काम को करने में सबसे श्रेष्ठ व्यक्ति, जिन्होंने इस विचार के तहत गुजरात में हजारों अल्पसंख्यकों का कत्लेआम किया था। इसलिए हमें यह समझ नहीं आता है कि उनकी कौन सी सोच नई है? नरेन्द्र मोदी भी बड़े-2 कारपोरेट घरानों की वकालत करते हैं और सब कुछ प्राईवेट करने की बातें करते हैं जिसमें वे रेलवे को भी ब$डे-२ पूंजीपतियों को सौंपने की राय कई बार व्यक्त कर चुके हैं। इसलिये उनकी कौन सी नई सोच है और उनसे कौन सी उम्मीद देश की जनता कर सकती हैं। हां पूंजीपतियों और कंपनियों को उनसे जरूर उम्मीद होगी। जबकि हकीकत यह है कि देश में कांग्रेस और भाजपा की आर्थिक नीतियों के विकल्प और देश को विभाजित करने वाली सोच के विकल्प में वामपंथी, प्र्रगतिशील व धर्म निरपेक्ष ताकतों को मजबूत किया जाये तभी हमारे देश को सही रूप में विकल्प हासिल होगा। जिसके लिए माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी आने वाले लोकसभा चुनावों से पूर्व जनता को जागरूक करने का अभियान चलायेगी।

 

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