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राष्ट्रीय समावेशी विकास संगोष्ठी का शुभारंभ

हिमाचल प्रदेश योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष गंगुराम मुसाफिर ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में 12वीं पंचवर्षीय योजना 22 हजार 800 करोड़ रूपये के बजट का प्रावधान रखा गया है, जो कि 11वीं पंचवर्षीय योजना से 65 प्रतिशत अधिक है। यह जानकारी उपाध्यक्ष ने आज देव सदन कुल्लू के सभागार में अर्थशास्त्र ने आज देव सदन कुल्लू के सभागार में अर्थशास्त्र पर दो दिवसीय राष्ट्रीय विकास संगोष्ठी का दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हिमाचल पहाड़ी राज्य ने 1948 में अपना सफर जीरो से शुरू किया और आज वो पर्वतीय राज्यों में उन्नति की मिसाल है। मुसाफिर ने कहा कि प्रदेश ने स्वास्थ्य, शिक्षा व सड़कों के क्षेत्र में अभूतपूर्व तरक्की की है तथा प्रदेश में तीव्र विकास हुआ है। प्रदेश में लिंग अनुपात 974/1000 है, जो कि अन्य राज्यों से बेहतर है। योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष ने पर्यावरण, कार्बन के्रडिट, रेल विस्तार में विषमताओं पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश की पर कैपिटा इनकम 65,335 है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर 53,331 है। उन्होंने बताया कि प्रदेश का 45 प्रतिशत बजट सामाजिक सुरक्षा पर व्यय हो रहा है, जिससे निर्धन वर्ग का उत्थान हो सके। मनरेगा व खाद्य सुरक्षा अधिनियम ने निर्धन को संबल दिया है तथा खाद्य सुरक्षा बिल से देशभर में 82 करोड़ लोग लाभान्वित होंगे तथा प्रदेश में 36 लाख लोगों को इसका लाभ मिलेगा। इससे पूर्व हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ए.एन. वाजपेयी व राजकीय महाविद्यालय कुल्लू की प्रधानाचार्य धनेश्वरी शर्मा ने मुख्यतिथि का स्वागत किया तथा संगोष्ठी का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। इस अवसर पर प्रदेश व देशभर के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री व विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्राचार्य भी उपस्थित थे।

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