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राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन पर कार्यशाला आयोजित

धर्मशाला, 23 मई: हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी, पाण्डुलिपि रिसोर्स सेन्टर शिमला तथा राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन, नई दिल्ली के सहयोग से जिला परिषद् हाॅल में आज एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। पूर्व प्रधानमंत्री निर्वासित तिब्बतियन सरकार प्रो0 समदोंग रिनपोछे बतौर मुख्यातिथि शिरकत की और उन्होंने ‘‘करूणा एवं अहिंसा की अवधारणाएं-संदर्भ बौद्ध पाण्डुलिपियां’’ विषय पर व्याख्यान किया।
हिमाचल अकादमी के सचिव तथा काॅर्डीनेटर पाण्डुलिपि रिसोर्स सैंटर, डा0 डीके गुप्ता ने पूर्व प्रधानमंत्री निर्वासित तिब्बत सरकार का स्वागत किया तथा कार्यक्रम के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि पाण्डुलिपि रिसोर्स सैंटर शिमला द्वारा राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन के सहयोग से अभी तक तीन तत्वबोध व्याख्यान तथा प्राचीन लिपियों के प्रशिक्षण के भी वर्ष 2006 में 12 दिवसीय प्रशिक्षण कुल्लू में, सात दिवसीय टांकरी प्रशिक्षण शिविर वर्ष 2007 में चामुण्डा तथा 21 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर वर्ष 2011 में आयोजित किए गए।
उन्होंने कहा कि इन शिविरों के माध्यम से विद्वानों को हिमाचल की प्राचीन लिपियों को सीखने का अवसर मिला है। इसके अतिरिक्त प्रदेश के लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से पाण्डुलिपि जागरूकता शिविर तथा सेमीनारों का भी आयोजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि अभी तक हिमाचल प्रदेश में पाण्डुलिपि रिसोर्स सैंटर द्वारा लगभग 90 हजार पाण्डुलिपियों का डाॅटा एकत्रित किया गया है जिसे राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन, नई दिल्ली को आॅन-लाईन करने के लिए भेजा जा चुका है।
इस अवसर पर डा0 पी0एन0 शर्मा ने भी अपने विचार रखे।
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