October 23, 2017

रामलाल ठाकुर ने जेपी प्रकरण पर मांगा मुख्यमंत्री का इस्तीफा ,कहा वीरभद्र सरकार ने रिजैक्ट की थी थर्मल प्लांटों की प्रपोजल

12 मई (प्रविंद्र शर्मा बिलासपुर) : पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस महासचिव रामलाल ठाकुर ने जेपी ग्रुप के खिलाफ दिये गये फैसले पर प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से तुरंत इस्तीफे की मांग है और इस कंपनी के घोटालों की सीबीआई से जांच की मांग की है । ठाकुर ने शनिवार को एक प्रैस कांफ्रैस में कहा कि जब तक मुख्यमंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं देते तक इस सारे प्रकरण की निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती क्योंकि सीबीआई को प्रदेश के मुख्यमंत्री से इसकी स्वीक्रति लेनी पडती है और जो मुख्यमंत्री कभी नहीं देंगें । ठाकुर ने कहा मान्य हार्इकोर्ट के फैसले में पेज संख्या 36 पर स्पष्ट कहा गया है कि प्रदेश में थर्मल पावर प्लांट लगाने के लिये दो कंपनियों मैसर्ज दीपक सिपनिंग 8 5 मैगावाट व दुल एलायेज 6 मैगावाट ने अपनी प्रपोजल पूर्व वीरभद्र सरकार में भेजी थी लेकिन तत्कालीन सरकार ने प्रदेश हित में इन कोयले पर आधारित थर्मल पावर प्राजैक्टों को अस्वीक्रत कर दिया था । ठाकुर ने आरोप लगाया कि मौजूदा भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही जे पी ग्रुप की 60 मैगावाट की थर्मल यूनिट को प्रदेश की पावर पालिसी को बदल कर स्वीक्रति प्रदान कर दी । ठाकुर ने कहा कि अभी तक पिछले फैसले की स्याही भी नहीं सूखी थी लेकिन इस प्रदेश विरोधी भाजपा सरकार ने प्रदेश के हितों को बेच दिया । ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी पिछले कई वर्षों से जेपी ग्रुप की मनमानियों को लेकर आवाज उठा रही है लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही । जेपी ग्रुप ने बागा सीमेंट प्लांट में करीब 250 बीघा वन भूमि पर सरकार और अधिकारियों से मिलीभगत कर के जबरदस्ती कब्जा कर लिया गया है लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई । यही नहीं केंद्र सरकार के औधोगिक पैकेज का लाभ लेने के लिये बघेरी सीमेंट प्लांट को 13 जनवरी 2010 को चला हुआ षो कर दिया गया जबकि असल में यह प्लांट 25 जनवरी को चला है । और तो और इस प्लांट के लिये जमीन अप्रैल माह में अलाट की गई लेकिन उससे पहले ही प्रदूषण विभाग और अन्य विभागों द्धारा इसकी जमीन की एनओसी जारी कर दी गई थी । इन सारे घोटालों की स्वतंत्र एजैंसी से जांच होनी चाहिये । ठाकुर ने आरोप लगाया कि प्रदेश की पंचायतों के लिये स्पोर्टस हेतू जारी किये गये 17 करोड की राशी में बहुत बडा घोटाला किया गया है और अपनी चहेती कंपनियों को लाभ पंहुचाने के लिये सारे नियम कानून ताक पर रख दिये गये हैं जिसकी भी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिये ।

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