Header ad
Header ad
Header ad

युवाओं में बढ़ता नशे का चलन चिंता की बात-सकलानी

युवा भावी समाज के निर्माता हैं। युवाओं से समाज को बहुत सी अपेक्षाएं हैं। इन अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिये जरूरी है कि युवाओं का समग्र विकास हो और सही निर्माण हो, इसके लिये अभिभावकों, अध्यापकों और समाज के वुद्विजीवी वर्ग को एकजुट प्रयास करने होंगे। यह बात आज उपायुक्त कार्यालय के सभागार में हि.प्र. स्वेच्छिक स्वास्थ्य संगठन और जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा संयुक्त तत्वाधान में सिगरेट तथा अन्य तम्बाकु उत्पाद अधिनियम (कोटपा) पर आयोजित एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यशाला के अवसर पर सहायक आयुक्त सुभाष सकलानी ने बतौर मुख्य अतिथि कही। कार्यशाला में सभी जिला व खण्ड स्तरीय अधिकारियों के अलावा स्वंय सेवी संस्थाओं के
प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सकलानी ने कहा कि युवा वर्ग नशे की ओर आकृष्ट हो रहा है, यह चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि हमारा देश विश्व का सर्वाधिक युवाओं का देश है और ऐसे में युवाओं पर असामाजिक तत्वों के प्रभाव की आशंका से भी सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने युवाओं का आहवान किया कि वे अपनी ऊर्जा देश निर्माण और सृजनात्मक कार्यों में लगाएं। उन्होंने बताया कि सोलन जिला को प्रदेश के साथ पहले ही सार्वजनिक स्थलों पर तम्बाकु रहित घोषित किया जा चुका है। इस दिशा में अभी बहुत सा कार्य करना बाकि है, जिसके लिये उन्होंने समाज के सभी वर्गो के सहयोग की बात कही।
हि.प्र. स्वेच्छिक स्वास्थ्य संगठन के सलाहाकार श्रीनिवास जोशी ने कोटपा पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सार्वजनिक स्थलों पर अभी भी 15 प्रतिशत लोग धूम्रपान करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश के अन्य राज्यों से आगे है। इसी तरह सामाजिक बुराईयों विशेषकर धूुम्रपान प्रयोग में कमी करके देश में मिसाल कायम की जा सकती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में घरों में अभी भी 82.5 प्रतिशत व कार्यक्षेत्र में 17.8 प्रतिशत लोग धूम्रपान कर रहे हैं। जोशी ने बताया कि 15 से 17 साल आयुवर्ग के करीब 16 फीसदी बच्चे व 20 से 34 साल आयुवर्ग के 60 फीसदी युवा नशे जैसी बुराई को अपना रहे हैं। उन्होंने इस संवेदनशील आयु में बच्चों को बुरी आदतों के प्रति आकृष्ट होने से रोकने में अध्यापक अहम् भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह दुःख की बात है कि स्कूलों में धूम्रपान व नशे पर सुवह प्रार्थना सभा में कोई बात नहीं की जाती है। उन्होंने बताया कि अभी भी स्कूलों के 100 गज के अन्दर नशीले पदार्थों की विक्री हो रही है, जिस पर अंकुश लगाना जरूरी है। इसमें सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 13 हजार अधिकारी कोटपा का उल्लंघन करने की स्थिति में चालान करने के लिये प्राधिकृत हैं, लेकिन केवल पुलिस ही इस कार्य
को कर रही है। उन्होंने कोटपा संरक्षण के लिये पुलिस की सराहना की। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. आरके गुप्ता तथा हि.प्र. स्वेच्छिक स्वास्थ्य संगठन के परियोजना अधिकारी रमेश बदरैल ने कोटपा अधिनियम के प्रावधानों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। अध्यक्ष पीआर रमेश ने धन्यवाद किया।

Share

About The Author

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Please Solve it * *

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)