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यहां माघी त्यौहार पर दी जाती है लाखों बकरों की बलि

2015_1image_11_58_202492495goat1-llसिरमौर: हिमाचल हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद माघी त्यौहार की शुरूआत में निभाई जाने वाली ‘भातियोज’ रस्म के लिए हजारों बकरों की बलि दी गई। जानकारी के अनुसार जिला सिरमौर के समूचे गिरीपार क्षेत्र में सोमवार से पारंपरिक ‘भातियोज’ के साथ एक महीने तक मनाया जाने वाला माघी त्योहार शुरू हो गया है। इस त्यौहार में महीने भर बकरों को काटा जाता है, जिसकी संख्या लाखों में होती है। हैरानी की बात तो यह है कि यह पर्व हिमाचल के शिलाई, पांवटा, राजगढ़ एवं रेणुका के 592 गांवों में मनाया जाता है। बताया जा रहा है कि पूरे क्षेत्र में सैकड़ों वर्ष पूर्व मां काली के रथ टूटते थे। इस दौरान महामारी भी फैलती थी। इससे बचने के लिए लोग माघी के दिन सैकड़ों बकरों को काटकर मां काली को प्रसन्न करते थे। 
भातियोज के दिन प्रात: 4 बजे उठकर सभी घरों में काली मां के नाम पर आज भी आटा और गुड़ से तैयार किया गया खेंडा (हलवा) काली माता को चढ़ाया जाता है। इस मौके पर ग्रामीण ‘ऐलो बोशतों दोतिए ढिंयू, रमाणे भुजे भांगो रे गिंऊ’ पारंपरिक लोक गीत बुजुर्गों द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। 
 

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