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मुख्य संसदीय सचिव श्री नंदलाल एवं श्री रोहित ठाकुर द्वारा 16 सितम्बर, 2013 को शिमला से जारी प्रेस वक्तव्य

मुख्य संसदीय सचिव श्री नंदलाल एवं मुख्य संसदीय सचिव श्री रोहित ठाकुर ने पूर्व मुख्यमंत्री श्री प्रेम कुमार धूमल द्वारा कुछ समाचार पत्रों में दिए गए वक्तव्य की कड़ी भत्र्सना करते हुए इसे तथ्यहीन और भ्रामक करार दिया है। उन्होंने कहा कि श्री धूमल पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं।
श्री नंदलाल एवं श्री रोहित ठाकुर ने हैरानी व्यक्त की कि पूर्व मुख्यमंत्री को आज सत्ता से बाहर होने पर सेब उत्पादकों के हित नजर आने लगे हैं, जबकि उन्होंने अपने पांच वर्षों के कार्यकाल में सेब उत्पादकों की सबसे अधिक अनदेखी की। सेब उत्पादक भली भांति जानते हैं कि पूर्व सरकार ने पांच साल केवल कागजी घोषणाएं की और जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ। श्री धूमल सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए बागवानों के हितैषी होने का ढोंग रच रहे हैं, जिसका उन्हें कोई फायदा होने वाला नहीं है।
मुख्य संसदीय सचिवों ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने ठियोग में 100 करोड़ रुपये की लागत से पराला मंडी के निर्माण की घोषणा की थी, लेकिन बजट में धन का कोई प्रावधान नहीं किया गया। वर्तमान कांग्रेस सरकार ने केंद्रीय प्रायोजित राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अन्तर्गत इसके निर्माण कार्य को पूरा करने का निर्णय लिया है और शीघ्र ही इसे पूरा कर लिया जाएगा। पूर्व भाजपा कार्यकाल में एचपीएमसी के रोहड़ू, जाबली, पतली कूहल, ओडी स्थित कोल्ड स्टोर बंद पड़े रहे, जिन्हें वर्तमान सरकार ने पुनः क्रियाशील बनाया है। छैला-नेरीपुल-सोलन मार्ग की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है और केंद्रीय सड़क निधि से इस मार्ग को स्तरोन्नत किया जाएगा।
श्री नंदलाल एवं श्री रोहित ठाकुर ने कहा कि जहां तक सेब आयात शुल्क का मामला है, एनडीए सरकार के कार्यकाल में इसे 50 प्रतिशत निर्धारित किया गया था, जो सर्वाधिक सीमा है। हालांकि उस समय इसे और बढ़ाया जा सकता था, परन्तु ऐसा नहीं किया गया, जिसके परिणाम आज भुगतने पड़ रहे हैं। इतना ही नहीं विदेशी सेब के आयात की अनुमति भी 1999 में केंद्र की भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के कार्यकाल में ही दी गई। बावजूद इसके वर्तमान सरकार सेब को विशेष उत्पाद घोषित करने के प्रयास कर रही है और हाल ही में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री आनंद शर्मा ने विश्वास दिलाया है कि विश्व व्यापार संगठन के अंतिम दौर की वार्ता में इस मामले को मजबूती से रखा जाएगा। प्रदेश सरकार भी इस बाबत उच्च स्तरीय समिति का गठन करेगी जो इस मामले पर अपना पक्ष मजबूती से प्रस्तुत करेगी। जहां तक साफ्टा से सेब आयात का मामला है उस पर भी केंद्रीय मंत्री ने इसके दुरूपयोग को रोकने की बात कही है। उन्होंने इरान से सेब आयात के आरोपों को भी निराधार बताया।

मुख्य संसदीय सचिवों ने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार के सुचारू प्रबंधन के परिणामस्वरूप लगभग 2.50 करोड़ से अधिक सेब की पेटियां देश की विभिन्न मंडियों में भेजी जा चुकी हैं। मंडी मध्यस्थता योजना के तहत खोले गए 270 प्रापण केंद्र सुचारू रूप से कार्य कर रहे हैं। विपरीत मौसम के बावजूद इस वर्ष सेब सीजन सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री को स्मरण करवाया कि वर्ष 2010 में एमआईएस के तहत प्रापण किया गया लगभग 30 करोड़ का सेब सड़कांे के किनारे सड़ गया, जबकि सत्ता में आते ही वर्ष 2008 में भी कमोबेश यही स्थिति रही और उस वर्ष भी लगभग 1.50 लाख बोरियां मंडियों तक नहीं पहुंच पाई। केंचुआ खाद इकाई के नाम पर बागवानों को गुमराह किया गया। पूर्व कार्यकाल में बागवानों से सेब ढुलाई के लिए तीन से चार गुणा ज्यादा किराया वसूला गया। पैकिंग सामग्री के रेट तिगुने हो गए थे।

उन्होंने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार बागवानों को श्रेष्ठ कंपनियों की सेब की गुणात्मक दवाइयां उपलब्ध करवा रही हैं। जबकि पूर्व भाजपा सरकार ने नालागढ़ की एक कंपनी को मानकों की अनदेखी कर तरजीह दी। पूर्व कार्यकाल में पांच वर्षों तक ठियोग-हाटकोटी-रोहड़ू मार्ग की हालत सुधारने के लिए कोई प्रयास नहीं किए, जबकि तत्कालीन सरकार के बागवानी मंत्री इसी क्षेत्र से संबंधित थे। उन्होंने कहा कि भाजपा ने कार्टन फैक्टरी को चलाने की बात अपने घोषणापत्र में की थी और सत्ता में आते ही इसकी मशीनरी कबाड़ में बेच दी। एचपीएमसी की चेन्नई स्थित बहुमूल्य जमीन बेची गई। नगवाईं और प्रगतिनगर में 66 बीघा जमीन वाइनरी के लिए दी गई, उसका क्या हुआ, इसका भी उन्हें जवाब देना चाहिए। पूर्व भाजपा सरकार ने एचपीएमसी में श्रमशक्ति बढ़ाने का कोई प्रयास नहीं किया और पूरे पांच साल एक भी नई नियुक्ति नहीं की। जो भी अधोसंरचना सृजित हुई वह सब कांग्रेस सरकारों की ही देन है।
उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार पुराने सेब पौधों के स्थान पर उन्नत किस्म के सेब पौधे लगाने के उद्देश्य से 85 करोड़ रुपये का ऐप्पल रिजुविनेशन प्रोजेक्ट को आरम्भ किया, लेकिन पूर्व सरकार लगभग 24 लाख रुपये की व्यय कर पाई, जिससे इसके वांछित परिणाम प्राप्त नहीं हुए। वर्तमान सरकार ने मण्डी मध्यस्थता योजना के अन्तर्गत इस वर्ष सेब, आम एवं नींबू प्रजाति के फलों के प्रापण मूल्यों में 50 पैसे की वृद्धि की है। इससे राज्य के लाखों किसानों व बागवानों कोे लाभ होगा।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकारें हमेशा किसानों-बागवानों की हितैषी रही है। पूर्व भाजपा सरकार झूठी घोषणाएं और क्षेत्रवाद के नाम पर लोगों को गुमराह करने वाले बयान तक ही सीमित रही और यही कारण है कि भाजपा को न केवल सेब उत्पादक क्षेत्र में बल्कि प्रदेश भर में जनता ने नकार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार भाजपा नेताओं की तरह शिगूफे छोड़ने का कार्य नहीं करती है बल्कि धरातल पर काम कर लोगों को श्रेष्ठ सुविधाएं उपलब्ध करवाने का कार्य करती है। उन्होंने श्री धूमल को सलाह दी कि वह सेब के नाम पर राजनीति करने के बजाये प्रदेश सरकार के इस दिशा में किये जा रहे प्रयासों को समर्थन दें। .0.

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