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मन आतंकित है और आँखें नम हैं, न जाने कौन सी घडी में हादसे हो जाएँ.

Photo Credit To Internet

गुडिया हत्या मामले में हमारी पुलिस, प्रशासन और सरकार ने जो किरकिरी करवाई है कांग्रेस की हार का वह सबसे बड़ा कारण बनेगी. इस घिनौने हत्या कांड के साथ पहले के जो तीन-चार हत्या कांड जुड़े हैं उनमे भी यही हुआ है.कानून,प्रशासन और सरकार पर रसूक किस कदर भारी पड़ा है ये मामले उसकी जीती जाती मिसालें हैं. इससे यह भी अनुमान लगाया जा सकता है कि पैसा और रसूख की दबंगता हिमाचल में कितनी मजबूती से पांव पसार रही है। गुडिया मामले में,हम कोटखाई के लोगों के साथ पहले दिन से CBI को केस सौंपने की मांग कर रहे थे. क्योंकि शिमला के ध्रुव, युग और करसोग का वनरक्षक हत्या मामलों में जो कुछ तमाशे हुए उन्हें पूरे हिमाचल वासियों ने बहुत करीब से महसूस किया है, कड़ी भाषा में कहा जाये तो ये मामले पुलिस और प्रदेश सरकार की नाकामियों के ऐसे मामले हैं जिन्होंने हिमाचल की शांतिप्रियता को कलंकित किया है और इन सभी में प्रदेश के मुख्यमंत्री की जिस तरह से छवि ख़राब हुयी है, उसकी भरपाई मुश्किल है.रही सही कसर मुख्य मंत्री के फेस बुक अकाउंट ऑपरेट करने वाले और लाखों का वेतन लेने वाले अतकनीकी लोग पूरी करने में लगे हैं जिन्हें यही पता नहीं की वे उनकी वाल पर क्या लिख रहे हैं और किस किस के फोटो चिपका रहे हैं.

जितना भय आज इन जघन्य अपराधों से हिमाचल के लोगों के दिलों में पसरा है, उसका बयां करना मुमकिन नहीं. बेचारी माएं डरी हुयी हैं, बेटियाँ आतंकित हैं, निर्दोष और गरीब भयभीत है कि न जाने वे किन जुर्मों में अंदर हो जायेंगे. मैं यह इसलिए लिख रहा हूँ की ये सभी मामलें मेरे भीतर कहीं बहुत गहरे घर कर गए हैं. लेकिन हामारे पास ले देकर एक दिल है, आंसू बहाने के लिए दो आंखे और अपना आक्रोश हल्का करने के लिए फेस बुक वाल, जिसके शायद कोई मायने नहीं और दो चार कमेंट या लाइक से ही बस इस भयाक्रांत दिल को तसल्ली मिलनी है. लेकिन सचमुच हिमाचल प्रदेश जो विश्व का एक बेहद शांति प्रिय और ईमानदार राज्य माना जाता है, वहां की शांति और ईमानदारी भी इस तरह चंद इंसानी जानवरों, उनकी सुरक्षा करते चंद कानून के रखवालों और चंद रसूखदारों के हाथों छिन भिन्न हो जाएगी, यह कभी सोचा भी न था. मुझे नहीं पता की CBI ने पहले सौंपे मामलों पर इतने बरसों बाद क्या किया है, लिकिन गुडिया मामले को यदि वह चंद दिनों में सुलझा देती है तो उनका इस देवभूमि पर बड़ा एहसान होगा. वह हमारी आखिरी उम्मीद हैं. करसोग के वन रक्षक का मामला भी अब CBI के हवाले ही हो क्योंकि उसके साथ बड़ा जंगल माफिया भी जुड़ा है.

गुडिया मामले में कोटखाई के साथ प्रदेश के लोंगों ने और मीडिया ने जिस तरह की एकता दिखाई है वह बनी रहनी चाहिए. हमारे शिमला के वकील भाइयों ने गुडिया हत्या मामले में संलिप्त गुनाहगारों के मामले लेने से इंकार कर दिया है, उनका यह फैसला तो सराहनीय है, लेकिन जिस तरह के आरोप स्थानीय लोग और मीडिया लगा रहा है कि इस केस में निर्दोष गोरखों की बालियाँ चढ़ी हैं, तो उनको भी बचाने का उतरदायित्व हमारे वकील भाइयों का ही है. जो भी अब हो अच्छा हो——-. यहाँ यह कहने को मन कर रहा है की यदि सारे मामले CBI को ही जाने हैं और घटिया सोच और दबंगता ही पुलिस के कामकाज पर हावी रहेगी तो इन पुलिस महकमों प्रांसगिकता क्या रह गयी है।

इसके साथ बड़ा सवाल यह भी उठता है कि इस देवभूमि में हमारे यूथ में इस तरह की दरिंदगी कैसे और किन कारणों से हो रही है? शायद इसके लिए खुला पैसा, नशा, परिजनों का संरक्षण और लोकल पुलिस की “मेहमान नवाजी” भी मुख्य कारण है। कितना अच्छा होता गुड़िया कांड में जो परिजन अपने जानवर बच्चों को बचाने के लिए कुछ भी करने की नीति अपना रहे है, उन में से कोई एक इंसानियत दिखाते अपने सपूत को खुद पुलिस के हवाले कर देते।

 

SR Harnot

Freelance Writer/Photographer

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Post source : SR Harnot, Freelance Writer and Photographer

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