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मनरेगा में कन्वर्जेंस पर कार्यशाला का आयोजन

 
ग्रामीण विकास विभाग द्वारा आज यहां महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में समाभिरूपता (कन्वर्जेेंस) पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में सहयोग करना तथा भूमि, जल एवं वन जैसे प्राकृतिक स्रोतों के पुनर्जीवन से सतत् जीवनोपार्जन सुविधाओं का सृजन करना है।
प्रधान सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज श्रीमती उपमा चैधरी ने इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि मनरेगा को हिमाचल प्रदेश में प्रभावी तरीके से कार्यान्वित किया जा रहा है। यह योजना पात्र ग्रामीण लोगों को विशेषकर स्थाई जीवनोपार्जन अवसर सृजित करने में सहयोग प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष में उन सभी लोगों को जो स्वेच्छा से अकुशल कार्य के लिए तैयार हैं को 100 दिन का निश्चित रोजगार उपलब्ध करवा जा रहा है। उन्होंने कहा कि मनरेगा योजनाओं के विकेन्द्रीकरण में सहयोग प्रदान कर रही है तथा योजना के अन्तर्गत यह भी सुनिश्चित बनाया जा रहा है कि ग्राम पंचायतों द्वारा कम से कम 50 प्रतिशत कार्य कार्यान्वित किया जाए। यह पारदर्शिता एवं जवाबदेही को बनाए रखने में भी सहयोग प्रदान कर रही है।
उन्होंने कहा कि योजना की समाभिरूपता स्थाई परिसम्पत्ति को सृजित करने तथा ग्रामीण लोगों को जीवनोपयोगी सुरक्षा उपलब्ध करवाने में सहयोग देगी। इसके अतिरिक्त यह पंचायतों एवं अन्य सम्बद्ध विभागों में उपलब्ध मनरेगा संसाधनों को भी सहयोग देगी। उन्होंने सम्बन्धित अधिकारियों को ग्राम सभाओं में उन परियोजनाओं को चिन्हित करने एवं विचार विमर्श करने के निर्देश दिए, जिन्हें समाभिरूपता मोड में कार्यान्वित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मनरेगा के अन्तर्गत कार्यान्वयन के लिए चिन्हित गतिविधियों को इसके कार्यों के वार्षिक शैल्फ में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाभिरूपता परियोजनाओं को वृहद बनाया जाना चाहिए ताकि इनका निर्धारित समयावधि में कार्यान्वयन सुनिश्चित बनाया जा सके और वेज मैटेरियल दर 60ः40 रखी जानी चाहिए।
श्रीमती उपमा चैधरी ने कहा कि प्रदेश सरकार मनरेगा कार्य को सामाजिक आॅडिट के दायरे में लाएगी ताकि पारदर्शिता बनाई रखी जा सके और धन का समुचित उपयोग सुनिश्चित बनाया जा सके।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के निदेशक श्री जे.सी. चैहान ने कार्यशाला में आए प्रतिभागियों का स्वागत किया और मनरेगा के साथ विभिन्न कार्यक्रमों की समाभिरूपता पर प्रस्तुतिकरण दिया।

भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के परामर्शी श्री एन. रंजन, सिक्किम सरकार के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज के विशेष सचिव श्री संदीप तांबे, तमिलनाड़ू सरकार में अतिरिक्त कलेक्टर/परियोजना निदेशक श्री किरण गुराला तथा उत्तरप्रदेश में विशेष सचिव श्रीमती कंचन वर्मा ने विभिन्न राज्यों में इसके कार्यान्वयन को लेकर विभिन्न विषयों पर अपना प्रस्तुतिकरण दिया।
सम्बद्ध विभागों के विभागाध्यक्ष, राज्य की विभिन्न जिलों के उपायुक्त, परियोजना अधिकारी, खण्ड विकास अधिकारी तथा अन्य हितधारक तथा केन्द्र सरकार व हिमाचल प्रदेश ग्रामीण विकास विभाग के अन्य अधिकारी भी कार्यशाला में उपस्थित थे।

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