October 21, 2017

मध्यस्थता प्रक्रिया पर दिया जाये बलः एसएल शर्मा

asधर्मशाला, 04 सितम्बर- लम्बित न्यायिक मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए
मध्यस्थता प्रक्रिया अहम् भूमिका निभा सकती है। आज के परिवेश में आवश्यक हो
गया है कि मध्यस्थता प्रक्रिया को न्यायिक प्रक्रिया में सम्मलित करने पर सभी
न्यायिक अधिकारी अधिक बल दें। यह उद्गार जिला एवं सत्र न्यायधीश एवं अध्यक्ष
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एस एल शर्मा ने मध्यस्थता पर आयोजित जागरूकता
सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुये व्यक्त किये ।
एस एल शर्मा ने बताया कि मध्यस्थता प्रक्रिया को बढ़ावा देने की आवश्यकता के
साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि लोगों में इस प्रक्रिया के प्रति विश्वास पैदा
किया जाये तथा लोगों को इसके बारे में जागरूक किया जाये। जिससे मामलों का
प्रभावशाली ढ़ग से शीघ्रता से निपटारा हो सके। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता
प्रक्रिया से जहां आपसी कलह का निपटारा सही तरीके से कम समय में पूर्ण होता है
वहीं दोनों पक्षों में आपसी सद्भाव भी बना रहता है। इस प्रक्रिया के मध्यम से
वादी व प्रतिवादी के धन व समय की तो बचत होती ही है वहीं गवाहों की भी
आवश्यकता नहीं रहती है। उन्होंने जिला में कार्य कर रहे समस्त न्यायिक
अधिकारियों से प्रत्येक माह कम से कम दो मामलों कोे इस प्रक्रिया के माध्यम से
हल करने के प्रयास होने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मध्यस्थता न्यायिक
प्रक्रिया हमारे आपसी मुद्दों को हल करने की पुराणिक प्रक्रिया है। जिससे
मुद्दों का हल अविलम्ब एवं बिना धन के व्यय से सम्भव हो पाता है।
    कार्यशाला में जिला के विभिन्न न्यायिक अधिकारी एवं प्रशिक्षित मध्यस्थों
ने भाग लिया तथा इसको अपनाने के संदर्भ में अपने विचार रखे व सुझाव भी दिये।
जिला एवं सत्र न्यायधीश (एक) राजीव बाली, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश
(तीन) श्रीमती ज्योत्सना ढढवाल, ने भी मध्यस्थता के विषय  पर जोर डालते हुये
कहा कि मध्यस्थता एक कम खर्च वाला त्वरित न्याय और लोगों की गोपनीयता को बनाए
रखने वाला साधन है। इस अवसर पर प्रशिक्षित मध्यस्थ टीसी राणा, केसी ठाकुर, नवल
किशोर शर्मा ने भी मध्यस्थता के महत्व और मध्यस्थता के लिए आने वाली कठिनाईयों
के निवारण हेतू विस्तृत जानकारी दी।
    इस अवसर पर अध्यक्ष जिला उपभोक्ता विवाद निवारण समिति, राजन गुप्ता,
अतिरिक्त जिला सत्र न्यायधीश-दो शरद लगवाल, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी
वीरेन्द्र ठाकुर, न्यायिक दंडाधिकारी (दो)   शिखा लखनपाल    , अतिरिक्त मुख्य
न्यायिक दंडाधिकारी नूरपुर डॉ अबीरा वसु उपस्थित थे।

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