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मंडी के गगनेश ने छोटी उम्र में ही तेजी से बढ़ाए सफलता की ओर कदम

,,,देखो— देखो चौकीदार,,,, बेटा बन गया चेंपियन
बैडमिंटन में जीत चुका है कई खिताब, अब चंडीगढ़ में होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता मंे आजमाएगा दांव
आर्थिक मदद और प्रोत्साहन मिले तो चौकीदार का यह बेटा छू सकता है बुलंदियां
मंडी, 22सितम्बर (पुंछी): ,पूत के पांव तो पालने में ही नजर आ जाते हैं, या फिर कहें कि होनहार विरवान के होत चिकने पात, जब कुछ करने की तमन्ना मन में हो, आत्मविश्वास और टेलेंट मौजूद हो तो न यह बात आड़े आती है कि उसके मां बाप गरीब हैं, ग्रामीण क्षेत्र से हैं, आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है या फिर कोई और बाधा है। यूं भी दुनिया में अनेकों बड़े काम ऐसे ही लोगों ने किए हैं जो कम पढ़े लिखे थे, गरीब परिवारों से रहे हैं या गरीब मां बाप के घर जन्मे हैं। मंडी सदर इलाके के गांव कोठी गैहरी के गगनेश छोटी उम्र (16 साल) में ही कई अभावों से जूझते हुए भी जिस तरह से उंचाईयां छूने लगा है यदि उसे प्रोत्साहन मिला, मदद मिली तो वह दिन दूर नहीं जब वह अपने गांव, शहर, जिले व प्रदेश का नाम रौशन करगा। गगनेश इस समय मंडी शहर की डीएवी (आर्य समाज) वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में जमा दो का छात्र है। उसका पिता बलदेव जिला खेल विभाग के पड्डल स्थित कार्यालय व मैदान में चौकीदारी करता है, तथा बीस सालों से दिहाड़ीदार के रूप में ही कार्यरत है। बाप के साथ गगनेश जब कभी पड्डल मैदान आ जाया करता था तो उसका मन भी हुआ कि जिस तरह से शहर के बच्चे खेलते हैं, कई प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं, वह भी इसमें हिस्सा ले। मैदान की देखभाल करने वाले चौकीदार का बेटा होने के नाते भले ही इसमें उसे कुछ हिचकिचाहट महसूस होती रही मगर जब वह बैडमिंटन हाल में खिलाडिय़ों को शॉट लगाते देखता तो रोमांचित हो जाता। आखिर उसने अपने पिता से मन की बात कही तो धीर धीर वह बैडमिंटन के इस खेल से परिचित होने लगा। वर्ष 2008 में जब वह सातवीं कक्षा का छात्र था तो उसने विधिवत खेलना शुरू कर दिया। मंडी में तैनात बैडमिंटन कोच हेमंत शर्मा ने उसमें प्रतिभा देखी तो उसके खेल पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया। यह कोशिश रंग लाई। 2011 में ही उसे राष्ट्रीय प्रतियोगिता में खेलने के लिए जयपुर राजस्थान भेजा गया जबकि एक नेशनल उसने दिल्ली में खेला। इसमें अच्छे प्रदर्शन का ही परिणाम यह हुआ कि 2011 में मनाली में हुई स्टेट ओपन बैडमिंटन चेंपियनशिप में उसने सिंगल और डब्बल दोनों खिताब अपने नाम करके तहलका मचा दिया। पिछले साल जब वह बिजय राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मंडी में पढ़ता था तो उसे बैडमिंटन में मिले इस खिताब के लिए सम्मानित किया गया। चंबा में हुई स्कूली बैडमिंटन चेंपियनशिप का खिताब भी गगनेश ने जीता। इसी महीने (10 से 14 सितंबर) ऊना में संपन्न हुई अंडर—17 राज्यस्तरीय बैडमिंटन प्रतियोगिता में गगनेश ने फाइनल में सिरमौर के लक्ष्य को हराकर कर खिताब पर कब्जा किया जबकि इसी प्रतियोगिता के डब्बल मुकाबले में गगनेश व आशुतोष की जोड़ी ने लक्ष्य व शुभम को हराया यह खिताब भी अपने नाम कर लिया। , विशेष भेंट में गगनेश ने बताया कि उसका चयन अब अंडर—17 नेशनल बैडमिंटन प्रतियोगिता के लिए हुआ है और चंडीगढ़ में होने जा रही है। अभी इसकी तारीख तय नहीं हुई है मगर उसका चयन इसके लिए हो गया है। उसने बताया कि उसे किसी तरह की आर्थिक मदद अभी कहीं से नहीं मिली है। पिता तो महज दिहाड़ीदार हैं, जिन पर पूर परिवार जिसमें उसका छोटा भाई व मां है, की जिम्मेवारी भी है और फिर गांव से आकर शहर में रहना और पढ़ाई करना किसी दिहाड़ीदार के वश में कहां है। यदि उसे बैडमिंटन किट, रिफ्रेशमेंट, कोचिंग व बाहर खेलने जाने के लिए आर्थिक मदद व प्रोत्साहन मिले तभी वह इस खेल में खुल का भाग्य आजमा सकता है। गगनेश पढ़ाई में भी अव्वल है। वह कामर्स का छात्र है और अच्छे नंबर हासिल कर रहा है।

 

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