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भाजपा पर भगवान मेहरबान!

default (50)जालंधर: नवम्बर महीने में ही पूरे साल के वित्तीय घाटे का 99 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर चुकी मोदी सरकार को वित्तीय मोर्चे पर बचाने के लिए भगवान खुद जमीन पर उतर आए प्रतीत हो रहे हैं। आर्थिक हलकों में अब यह चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के पीछे जरूर किसी दैवीय शक्ति का हाथ है। सरकार ने इस वित्त वर्ष में 5.31 लाख करोड़ रुपए के वित्तीय घाटे का लक्ष्य रखा था लेकिन नवम्बर महीना पूरा होते ही सरकार को इस लक्ष्य में से 5.25 लाख करोड़ रुपए का घाटा हो चुका है। कच्चे तेल के दाम 4.50 डॉलर प्रति बैरल के नीचे गिर जाने के बाद आर्थिक जगत की इस चर्चा पर हर कोई सोचने पर मजबूर है। कच्चे तेल की फिसलन से सरकार को बैठे-बिठाए अपने पहले 10 माह के भीतर करीब 1.50 लाख करोड़ का फायदा होने का अनुमान लगाया जा रहा है। मोदी सरकार जब सत्ता में आई थी तो कच्चे तेल के दाम 115 डॉलर प्रति बैरल थे लेकिन बुधवार शाम तक कच्चा तेल 47 डॉलर प्रति बैरल तक लुढ़क चुका था। कच्चे तेल में इतनी गिरावट 2009 में ही देखने को मिली थी जब क्रूड के दाम 117 डॉलर प्रति बैरल से 36 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गए थे। कच्चे तेल की गिरावट से न सिर्फ सरकार का करीब 1 लाख करोड़ रुपए का सबसिडी बिल कम हुआ बल्कि इससे वित्त मंत्रालय ने पैट्रोल-डीजल पर 3 बार उत्पाद शुल्क बढ़ाकर 20,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई का रास्ता भी साफ हो गया। आर्थिक जानकारों का कहना है कि तेल की फिसलन से सरकार द्वारा बिना कोई कदम उठाए महंगाई काबू में आ गई। डीजल के दाम को बाजार के हवाले करने का आर्थिक फैसला लेने का साहस भी सरकार कच्चे तेल की गिरावट के चलते ही कर पाई। फसलों के समर्थन मूल्य में कम वृद्धि के अलावा सरकार ने 6 माह में ऐसा कोई बड़ा फैसला नहीं किया जिससे महंगाई कम हो लेकिन फिर भी पैट्रोल, डीजल और एल.पी.जी. के दाम कम हो रहे हैं और जनता में मोदी की बल्ले-बल्ले हो रही है। सोचने वाली बात है कि बिना भगवान की मर्जी के यह सब कैसे मुमकिन हो सकता है।
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