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भरमौर व होली में सेबों को लगी वूली एफिड बिमारी

24 सितम्बर 2013 (गुरमीत नागपाल)
भरमौर (चंबा)। भरमौर और होली क्षेत्र में कुच्छ स्थानों पर सेब को वूली एफिड बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया है। विभाग का कहना है कि अधिकतर बागबानों के बगीचों में जागरूकता के अभाव में बीमारियां लगती हैं। प्रदेश सरकार ने लोगों की सुविधा के लिए जगह-जगह कार्यालय खोल रखे हैं। लोग यहां से प्रदेश सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों का लाभ उठा सकते हैं। इसमें बागबानी भी एक अहम विभाग है। विभाग के विशेषज्ञों से राय लेकर अपने बागीचों को बीमाररयों से बचाकर लोग अपनी आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं। कुछ बागबान फसल लेने तक ही सीमित होते हैं। उन्हें फलदायक पौधों की सही तरह से सेवा करने का ज्ञान नहीं होता हैं। भरमौर में कई बागबान ऐसे हैं, जो हर साल लाखों रुपये सेब की फसल से कमाते हैं और समय-समय पर संबंधित विभाग से सलाह लेकर स्प्रे शेड्यूल अपनाते हैं। उपमंडल भरमौर व होली में इन दिनों कई बगीचों में वूली एफिड बीमारी की शिकायतें मिल रही हैं। इस बारे में उद्यान एवं बागबानी विभाग के विषय वस्तु विशेषज्ञ दौलत राम ठाकुर ने कहा कि जिन बागबानों ने विभाग के अनुसार स्प्रे शेड्यूल अपनाया है। उनके बगीचों में इस तरह की कोई बीमारी नहीं है। विभाग ने वूली एफिड बीमारी से बचाव के लिए बिक्री केंद्रों में क्लोरोपाइरा फोरस दवाई उपलब्ध करवाई है, जबकि थिमेट पौधों की जड़ों में डाला जाता है। अधिकतर बागबान विभाग को समस्या के बारे में नहीं बताते हैं। जिससे उन्हें बीमारियों से जूझना पड़ता है। उन्होंने बागबानों से आग्रह किया है कि पौधों को किसी भी तरह की बीमारी लगती है, तो विभाग को अवगत कराएं, ताकि विभागीय अधिकारी बीमारी के बारे में पता लगा सकें। विभागीय निर्देशों और स्प्रे शेड्यूल को अपनाकर पौधों को बीमारियों से बचाया जा सकता है।

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