October 21, 2017

बिलिंग में टेक ऑफ साइट के विकास पर खर्च होंगे 1 करोड़

sudhir-Sharma
पपरोला। पैरा ग्लाइडिंग के लिए विश्व भर में मशहूर बिलिंग को पर्यटन की दृष्टि से निखारने के लिए सरकार धन की कमी नहीं आने देगी। घाटी में पैराग्लाइडिंग की टेक ऑफ साइट को विकसित करने के लिए प्रदेश का पर्यटन विभाग एक करोड़ रुपए खर्च करने जा रहा है। यह बात हिमाचल के शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने चौबीन स्थित अपने निवास पर आयोजित बिलिंग पैरा ग्लाइडिंग एसोसिएशन की बैठक मेें कही। गौरतलब है कि सुधीर शर्मा बिलिंग पैरा ग्लाइडिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने बताया कि अक्तूबर माह में बिलिंग मेें पैरा ग्लाइडिंग वल्र्ड कप आयोजित किया जाएगा। इसके लिए एफएआई (फेडरेशन एरोनोटिक इंटरनेशनल) द्वारा इस बार पैरा ग्लाइडिंग वल्र्ड कप कैटागरी-टू का दर्जा प्रदान किया गया है। इस बार एसोसिएशन पर्यटन विभाग के सहयोग से पहली बार वल्र्ड कप करवा रही है। अब तक एसोसिएशन के पास विश्व भर से 380 पैराग्लाइडर्ज का ऑनलाइन पंजीकरण हो चुका है। पंजीकरण 21 जुलाई, 2015 तक जारी रहेगा। उसके बाद इन पैराग्लाइडर्ज की सिलेक्शन की जाएगी। जानकारी के अनुसार इस बार 125 से 130 पैराग्लाइडर्ज वल्र्ड कप प्रतिस्पर्धा में भाग ले सकते हैं। सुधीर शर्मा ने कहा कि मार्च माह में वल्र्ड कप के आयोजन को लेकर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में बैठक की जाएगी। यही नहीं, बिलिंग से बीड़ तक पांच फाइबर रेन शेल्टर व जगह-जगह पर्यटकों की सुविधा के लिए बेंच लगाए जाएंगे, लेंडिंग साइट पर शीघ्र ही हैंडपंप लगाया जाएगा। भारी भीड़ को देखते हुए चौगान कालोनी को जाने वाली सड़क वन-वे की रही है, जो चौगान से सूजा तक जाएगी। लैंडिंग साइट क्योर में भूमि अधिग्रहण की जा रही है। इस बार टेक ऑफ साइट बिलिंग में उड़ान भरने के लिए दो साइटें बनाई जा रही हैं। इसके अलावा एयर शो के प्रदर्शन के लिए रक्षा मंत्रालय से बात चल रही है। वल्र्ड कप के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से निपटने हेतु 24 घंटे हेलिकाप्टर की व्यवस्था रहेगी, वहीं देश के पांच नामी अस्पतालों में भी पैराग्लाइडर्ज के लिए चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इस बार लाइव टे्रनिंग सिस्टम भी इंस्टाल किया जा रहा है, जिसके लिए वल्र्ड कप एसोसिएशन अपने उपकरणों पर आठ करोड़ खर्च करेगी। ऐसी व्यवस्था होगी कि हर पैराग्लाइडर्ज को डिवाइस दिया जाएगा उस उपकरण से पैराग्लाइडर कहां उड़ान भर रहा है और पैराग्लाइडर की क्या स्थिति है इस बात को गूगल में सर्च किया जा सकता है। इस उपकरण से हर पायलट की गतिविधियों का पता कंट्रोल रूम से लग जाएगा।

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