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बिलासपुर-स्वारघाट एनएच पर आवारा पशुओं का डेरा

 स्वारघाट — राष्ट्रीय उच्च मार्ग चंडीगढ़-मनाली 205 पर स्वारघाट से लेकर बिलासपुर तक आवारा पशुओं को घूमते हुए देखा जा सकता है। इन बेसहारा आवारा पशुओं  के एनएच पर घूमते रहने के कारण दुर्घटनाओं का ग्राफ  भी निरंतर बढ़ता जा रहा है। ये आवारा पशु बीच सड़क में झुंड बनाकर घूमते व बैठे रहते हैं और बार-बार हार्न बजाने व हटाने पर भी हटने का नाम नहीं लेते, जिस कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है।   दिन के समय तो ये पशु सड़कों पर घूमते रहते हैं और दिन ढलते ही दाना-पानी का जुगाड़ करने के लिए किसानों के खेतों की ओर रुख कर लेते हैं। इन आवारा पशुओं में अधिकतर गौधन शामिल हैं, जोकि वैदिक काल से ही भारतीय धर्म संस्कृति व सभ्यता का प्रतीक रहे हैं, परंतु कुछ स्वार्थी लोग अपना स्वार्थ पूरा होने पर इस गौधन को बेसहारा दर-दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ देते हैं। जब गाय दूध देना बंद कर देती है तथा बैल जब खेती योग्य नहीं रह जाता तो लोग उन्हें गुपचुप तरीके से सुनसान जगहों पर छोड़ देते हैं। कुछ किसान खेत जोतने का कार्य पूरा करने के बाद बैलों को आवारा छोड़ देते हैं ताकि उन्हें बैलों को पालने में दिक्कतें न उठानी पड़े और जब अगली बार खेत जोतने की बारी आती है, तो उन्हें दौबारा पकड़ लेते हैं। लोगों की इस स्वार्थता के कारण एनएच पर आवारा पशुओं की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। आवारा पशुओं की बात करें, तो स्वारघाट कस्बे में आवारा सांडों ने क्षेत्र में खूब आतंक मचा रखा है। राहगीरों, वाहन चालकों व पशुशालाओं में लोगों को सांड के डर से जान हथेली पर रख कर जाना पड़ता है। लावारिस सांडों ने स्वारघाट के एक 70 वर्षीय महंत भगत राम पर इस आवारा सांड ने हमला बोल दिया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया था व उसकी रीढ़ की हड्डी फेक्चर हो गई थी, जिसका  पीजीआई चंडीगढ़ में चले लंबे उपचार के बाद अब सेहत में कुछ हद तक सुधार हुआ  है। दूसरी घटना में साठ वर्षीय टेक चंद जोकि अपनी पशुशाला में पशुओं को बांध रहा था तभी अचानक आवारा सांड ने पशुशाला में उस पर हमला बोल दिया, जिसमे टेक चंद के शरीर पर अंदरूनी चोटें आईं तथा उसके कपड़े भी फट गए थे  हालांकि जिला में धार, टटोह तथा बरोट, ग्वालथाई में गौसदन स्थापित किए गए हैं परंतु उनमें भी क्षमता से अधिक पशु है।

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